VB-G Ram-G Scheme: ग्रामीण भारत के विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 के बजट में बड़ा पुनर्गठन किया है। इस बार पारंपरिक रोजगार योजनाओं की जगह नई VB-G Ram-G योजना को सबसे बड़ा बजट हिस्सा दिया गया है। बजट विश्लेषण के अनुसार, विभागीय आवंटन का बड़ा भाग रोजगार, ग्रामीण आवास और बुनियादी ढांचे पर केंद्रित किया गया है, जिससे गांवों में स्थायी विकास मॉडल तैयार करने का लक्ष्य है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय का कुल बजट कितना?
वित्त वर्ष 2026–27 में Ministry of Rural Development को कुल लगभग 1.97 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह पिछले संशोधित अनुमान से करीब 4% अधिक है। भूमि संसाधन विभाग को भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी के साथ लगभग 2,654 करोड़ रुपये दिए गए हैं — जो पिछले वर्ष से करीब 50% ज्यादा है।
VB-G Ram-G योजना को मिला सबसे बड़ा हिस्सा
बजट विश्लेषण (PRS Legislative Research द्वारा) के अनुसार:
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VB-G Ram-G योजना: ₹95,692 करोड़
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विभागीय बजट का हिस्सा: लगभग 40%
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125 दिन रोजगार गारंटी का प्रावधान
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फंड शेयरिंग: केंद्र–राज्य 60:40
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पूर्वोत्तर/हिमालयी राज्यों के लिए: 90:10
नई योजना को ग्रामीण रोजगार का नया ढांचा माना जा रहा है, जिसमें राज्यों की वित्तीय भागीदारी भी बढ़ेगी।
63% बजट सिर्फ दो बड़ी योजनाओं पर
ग्रामीण विकास बजट का सबसे बड़ा हिस्सा दो योजनाओं में केंद्रित है:
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VB-G Ram-G — 40%
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प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण — 23%
इन दोनों को मिलाकर कुल 63% बजट आवंटित हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार रोजगार + आवास को ग्रामीण नीति का मुख्य आधार बना रही है। (VB-G Ram-G Scheme)
प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण में बड़ा इजाफा
ग्रामीण आवास को बढ़ावा देने के लिए Pradhan Mantri Awas Yojana (ग्रामीण) के बजट में बड़ी बढ़ोतरी की गई है।
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आवंटन: लगभग ₹54,917 करोड़
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वृद्धि: करीब 65–70%
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लक्ष्य: पक्के घरों का निर्माण
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चुनौतियां: भूमि उपलब्धता, पलायन, लाभार्थी स्तर की देरी
अब तक लक्ष्यित घरों में से लगभग 70% ही पूरे हो पाए हैं।
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अन्य प्रमुख योजनाओं का बजट हिस्सा
बाकी ग्रामीण योजनाओं को भी संतुलित आवंटन मिला है:
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन — 8%
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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना — 8%
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राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम — 4%
सड़क और आजीविका मिशन पर खर्च ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करेगा।
मनरेगा बजट में बड़ी कटौती
Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (मनरेगा) के बजट में इस बार उल्लेखनीय कमी देखी गई।
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नया आवंटन: ₹30,000 करोड़
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पिछला संशोधित अनुमान: ₹88,000 करोड़
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कमी: लगभग 66%
रिपोर्ट के अनुसार:
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औसतन रोजगार: 48–52 दिन प्रति परिवार
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100 दिन का काम पूरा करने वाले परिवार: 10% से कम
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कुल खर्च का ~70% मजदूरी पर जाता रहा है
मजदूरी भुगतान पर रिपोर्ट में क्या खुलासा?
कई राज्यों में श्रमिकों को घोषित दर से कम वास्तविक मजदूरी मिलने की बात सामने आई है।
कुछ राज्यों में भुगतान अधिसूचित दर से 30–60 रुपये तक कम दर्ज किया गया।
यह मुद्दा भविष्य में ग्रामीण रोजगार योजनाओं की प्रभावशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।
क्या बदल रहा है ग्रामीण विकास का मॉडल?
नए बजट पैटर्न से तीन बड़े संकेत मिलते हैं:
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रोजगार + आवास पर फोकस
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राज्यों की ज्यादा भागीदारी
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इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थायी परिसंपत्तियों पर जोर
यानी ग्रामीण विकास अब सिर्फ अस्थायी रोजगार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक संरचनात्मक विकास मॉडल की ओर बढ़ रहा है।













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