Time Stopped Village: दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जहां जाकर लगता है जैसे समय ठहर गया हो। इंग्लैंड का टाइनहैम गांव (Tyneham Village) ऐसी ही एक रहस्यमयी जगह है, जहां पिछले 82 सालों से वक्त आगे नहीं बढ़ा। यहां की गलियां, मकान और माहौल आज भी 1940 के दशक की कहानी बयां करते हैं। डॉर्सेट काउंटी में स्थित यह गांव न सिर्फ अजीब है, बल्कि इतिहास और भावनाओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
पत्थर के घर और खामोश गलियां, जैसे थम गया हो वक्त
टाइनहैम गांव में कदम रखते ही ऐसा लगता है मानो आप आधुनिक दुनिया से कटकर किसी पुराने युग में पहुंच गए हों।
यहां के:
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पत्थर से बने मकान
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पुराने लैंपपोस्ट
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सुनसान चौराहे
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वीरान सड़कें
आज भी उसी हालत में हैं, जैसे दशकों पहले हुआ करती थीं। यहां न कोई ट्रैफिक है, न भीड़ और न ही आधुनिक शोर—सिर्फ सन्नाटा।
द्वितीय विश्व युद्ध ने बदल दी गांव की किस्मत
टाइनहैम कभी एक आबाद और खुशहाल गांव था। लेकिन साल 1943 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसकी कहानी पूरी तरह बदल गई। ब्रिटिश सरकार ने युद्ध की जरूरतों को देखते हुए इस गांव को सेना के कब्जे में लेने का फैसला किया। वजह थी पास में मौजूद Lulworth Firing Range, जो सैन्य अभ्यास के लिए बेहद अहम थी। सरकारी आदेश के बाद पूरे गांव को खाली करा दिया गया।
घर छोड़ते वक्त लोगों की आंखों में थी वापसी की उम्मीद
गांव के सैकड़ों लोग अपने घर, जमीन और यादें पीछे छोड़कर चले गए। सबको भरोसा था कि युद्ध खत्म होने के बाद वे वापस लौटेंगे। गांव के चर्च के गेट पर लगाया गया एक संदेश आज भी लोगों को भावुक कर देता है। इसमें लिखा था कि गांव और चर्च का ख्याल रखा जाए, क्योंकि लोग देश की आजादी के लिए अपना घर छोड़ रहे हैं और एक दिन जरूर लौटेंगे। (Time Stopped Village)
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लेकिन गांव में कभी नहीं लौटी जिंदगी
युद्ध खत्म हुआ, लेकिन टाइनहैम के लोगों की वापसी नहीं हो सकी। सेना ने इस इलाके को लगातार मिलिट्री ट्रेनिंग जोन के रूप में इस्तेमाल करना जारी रखा। नतीजा यह हुआ कि गांव हमेशा के लिए निर्जन हो गया। धीरे-धीरे मकान टूटने लगे, गलियां सुनसान होती चली गईं और समय वहीं थम गया।
आज एक जीवित स्मारक है टाइनहैम गांव
आज टाइनहैम गांव को पर्यटकों के लिए खोला गया है। यह कोई भूतिया गांव नहीं, बल्कि एक जीवित इतिहास है, जो बताता है कि युद्ध का असर आम लोगों की जिंदगी पर कितना गहरा होता है। यह जगह हमें सिखाती है कि कुछ फैसले पीढ़ियों तक अपनी छाप छोड़ जाते हैं।
क्यों खास है टाइनहैम गांव?
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यहां 82 साल से समय रुका हुआ है
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आज भी 1943 का माहौल महसूस होता है
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युद्ध की कीमत आम लोगों ने चुकाई
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इतिहास, त्याग और सन्नाटे की अनोखी मिसाल















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