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Sanatan calendar: Brahma Ji और सृष्टि की शुरुआत, हिंदू नव वर्ष 1 जनवरी से क्यों अलग है? जानिए सनातन कैलेंडर का रहस्य…

Sanatan calendar: Brahma Ji और सृष्टि की शुरुआत, हिंदू नव वर्ष 1 जनवरी से क्यों अलग है? जानिए सनातन कैलेंडर का रहस्य...

Sanatan calendar: जब भी “नया साल” शब्द सुनते हैं, तो दिमाग में सबसे पहले 1 जनवरी की तारीख आती है। आतिशबाज़ी, पार्टी और जश्न—यही आधुनिक नव वर्ष की पहचान बन चुकी है। लेकिन सनातन धर्म और भारतीय परंपरा के अनुसार नया साल 1 जनवरी से नहीं, बल्कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना का कार्य आरंभ किया था। यही कारण है कि इसे हिंदू नव वर्ष, नव संवत्सर या विक्रम संवत की शुरुआत कहा जाता है।

ब्रह्मा जी और सृष्टि का आरंभ: शास्त्र क्या कहते हैं?

हिंदू धर्मग्रंथों जैसे ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण में उल्लेख मिलता है कि

  • चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन
  • भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्मांड, समय, ग्रहों और जीवों की रचना शुरू की

इस दिन को सत्य युग का प्रारंभ भी माना जाता है। यही वजह है कि हिंदू नव वर्ष को केवल कैलेंडर परिवर्तन नहीं, बल्कि सृष्टि और चेतना के नव आरंभ का प्रतीक माना जाता है।

विक्रम संवत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

धार्मिक मान्यता के साथ-साथ हिंदू नव वर्ष का ऐतिहासिक महत्व भी है।

  • इसी दिन सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर विजय प्राप्त की

  • इसके बाद विक्रम संवत कैलेंडर की शुरुआत हुई

  • यह संवत आज भी भारत और नेपाल में व्यापक रूप से प्रचलित है

विक्रम संवत, अंग्रेजी कैलेंडर से 57 वर्ष आगे चलता है।

हिंदू नव वर्ष और अंग्रेजी नव वर्ष में बड़ा अंतर

1. समय गणना का आधार

  • हिंदू कैलेंडर: चंद्र और सूर्य दोनों की गति पर आधारित (Luni-Solar)

  • अंग्रेजी कैलेंडर: केवल सूर्य की गति पर आधारित (Solar)

2. महीनों की संरचना

  • हिंदू महीनों की शुरुआत अमावस्या या पूर्णिमा से

  • अंग्रेजी महीनों में 28 से 31 दिन तय

3. दिन की शुरुआत

  • हिंदू परंपरा में दिन की शुरुआत सूर्योदय से

  • अंग्रेजी कैलेंडर में दिन रात 12 बजे से शुरू (Sanatan calendar)

4. प्रकृति और ऋतु चक्र

  • हिंदू नव वर्ष ऋतुओं, खेती और प्रकृति से जुड़ा

  • अंग्रेजी नव वर्ष में प्रकृति से सीधा तालमेल नहीं

हिंदू नव वर्ष का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व

वसंत ऋतु का आगमन

हिंदू नव वर्ष के समय वसंत ऋतु होती है, जब:

  • पेड़ों पर नई कोपलें आती हैं

  • मौसम संतुलित रहता है

  • वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है

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चैत्र नवरात्रि की शुरुआत

  • इसी दिन से चैत्र नवरात्रि प्रारंभ होती है

  • शक्ति साधना और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ समय

कृषि और समृद्धि का प्रतीक

  • किसानों के लिए नई फसल और नई शुरुआत का संकेत

  • सामाजिक और आर्थिक जीवन से गहरा जुड़ाव

1 जनवरी बनाम हिंदू नव वर्ष: कौन अधिक प्राकृतिक?

जब 1 जनवरी को नया साल मनाया जाता है, उस समय:

  • भारत में कड़ाके की ठंड

  • प्रकृति सुप्त अवस्था में

जबकि हिंदू नव वर्ष:

  • जीवन, ऊर्जा और सृजन का प्रतीक

  • प्रकृति के स्वाभाविक चक्र के अनुरूप

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