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Sabarimala Yatra: इरुमुदिकट्टू क्या है? बिना इसके भगवान अयप्पा के दर्शन अधूरे क्यों माने जाते हैं…

Sabarimala Yatra: इरुमुदिकट्टू क्या है? बिना इसके भगवान अयप्पा के दर्शन अधूरे क्यों माने जाते हैं...

Sabarimala Yatra: केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में इन दिनों वार्षिक मकरविलक्कु तीर्थयात्रा का दौर चल रहा है। हजारों श्रद्धालु भगवान अयप्पा के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। भक्त जब 18 पवित्र सीढ़ियां (Pathinettampadi) चढ़ते हैं तो उनके सिर पर एक विशेष प्रकार का थैला होता है—इरुमुदिकट्टू। सबरीमाला के नियमों के अनुसार, इरुमुदिकट्टू के बिना कोई भी भक्त 18 सीढ़ियां चढ़कर भगवान अयप्पा के दर्शन नहीं कर सकता।

41 दिनों का व्रत और इरुमुदिकट्टू का संबंध (41 Days Vratham and Irumudikettu Ritual)

सबरीमाला यात्रा से पहले भक्त 41 दिनों का कठोर व्रत (व्रतम) रखते हैं।
इस दौरान—

  • काले या नीले वस्त्र पहनते हैं

  • माला धारण करते हैं

  • सात्त्विक जीवन अपनाते हैं

  • क्रोध, नशा, विलासिता से दूर रहते हैं

माना जाता है कि ये 41 दिन शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करते हैं।
इरुमुदिकट्टू इस 41-दिन की आध्यात्मिक साधना का प्रतीक है।

इरुमुदिकट्टू क्या है? (What is Irumudikettu?)

इरुमुदिकट्टू दो हिस्सों वाला एक पवित्र थैला है जिसे भक्त सिर पर रखकर सबरीमाला ले जाते हैं। यह सिर्फ एक बैग नहीं, बल्कि भक्त की श्रद्धा, तपस्या और समर्पण का प्रतीक है।

इरुमुदिकट्टू में क्या-क्या रखा जाता है? (Items Inside Irumudikettu)

इरुमुदिकट्टू दो भागों में विभाजित होता है:

1️⃣ मुनमूडी (भगवान को अर्पण के लिए)

इसमें शामिल होते हैं—

  • घी से भरा हुआ नारियल (आत्मसमर्पण और पवित्रता का प्रतीक)

  • सूखा चावल

  • कपूर

  • रेशम के कपड़े

  • अवल (चिवड़ा)

  • पान

  • फूल

  • पूजा सामग्री

यह भाग भगवान अयप्पा के चढ़ावे के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाता है।

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2️⃣ पिनमूड़ी (यात्रा में उपयोग के लिए)

इसमें शामिल होते हैं—

  • यात्रा के दौरान जरूरी सामान

  • व्यक्तिगत वस्तुएं

  • कुछ जगहों पर “नादुमुदी”—जिसमें चढ़ावे से जुड़े सिक्के या रसीदें रखी जाती हैं

नादुमुदी की यह प्रथा सीमित इलाकों में ही प्रचलित है। (Sabarimala Yatra)

सबरीमाला में इरुमुदिकट्टू का धार्मिक महत्व (Religious Importance of Irumudikettu)

  • भक्त इरुमुदिकट्टू सिर पर रखकर ही 18 पवित्र सीढ़ियां चढ़ सकते हैं

  • यह भगवान अयप्पा को समर्पण का प्रतीक है

  • 41 दिनों के व्रत का पूर्ण रूप से स्वीकार किया जाना दर्शाता है

  • बिना इसके दर्शन करना अवैध और अधूरा माना जाता है

सबरीमाला की परंपरा में, इरुमुदिकट्टू भक्त की यात्रा, त्याग और तप का सम्मान है।

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