Narasimha Dwadashi 2026: फाल्गुन मास में होली से ठीक पहले आने वाली नरसिंह द्वादशी का पर्व आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु के उग्र अवतार Narasimha को समर्पित है। यह व्रत धर्म की अधर्म पर विजय और सच्ची भक्ति की रक्षा का प्रतीक है। आइए जानते हैं साल 2026 में नरसिंह द्वादशी कब है, इसका महत्व क्या है और भक्त प्रह्लाद से इसका क्या संबंध है।
नरसिंह द्वादशी 2026 कब है?
- पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 28 फरवरी 2026 को नरसिंह द्वादशी मनाई जाएगी।
- यह तिथि होलिका दहन से कुछ दिन पहले आती है, इसलिए इसे होली के पर्व से जुड़ा हुआ माना जाता है।
भक्त प्रह्लाद से क्या है संबंध?
नरसिंह द्वादशी का सीधा संबंध विष्णु भक्त Prahlada से है। पुराणों के अनुसार, प्रह्लाद दैत्यराज Hiranyakashipu के पुत्र थे। हिरण्यकश्यप स्वयं को ईश्वर मानता था और चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें। लेकिन प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु के परम भक्त थे। क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को कई बार मारने की कोशिश की, लेकिन हर बार भगवान विष्णु ने उनकी रक्षा की।
कथा के अनुसार, जब हिरण्यकश्यप ने खंभे को लात मारकर पूछा कि क्या तुम्हारा भगवान इसमें भी है, तब उसी स्तंभ से भगवान नरसिंह प्रकट हुए। उन्होंने संध्या समय, चौखट पर, आधे मानव और आधे सिंह रूप में दैत्यराज का वध किया। यह घटना धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक मानी जाती है।
होली और नरसिंह द्वादशी का कनेक्शन
फाल्गुन मास में पहले नरसिंह द्वादशी और फिर Holi का पर्व आता है।
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नरसिंह द्वादशी भक्ति और सत्य की रक्षा की याद दिलाती है।
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होलिका दहन अहंकार और अन्याय के अंत का प्रतीक है।
दरअसल, होली का मूल संदेश भी यही है—सच्ची आस्था और धर्म की जीत। नरसिंह द्वादशी उसी भावना की आध्यात्मिक भूमिका तैयार करती है।
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नरसिंह द्वादशी व्रत विधि
अगर आप इस दिन व्रत रखना चाहते हैं, तो ये सरल विधि अपनाएं:
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प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
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भगवान विष्णु और नरसिंह भगवान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
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पीले फूल, चंदन, धूप-दीप अर्पित करें
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विष्णु सहस्रनाम या नरसिंह स्तोत्र का पाठ करें
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दिनभर व्रत रखकर शाम को आरती के बाद फलाहार करें
मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-शांति का वास होता है। (Narasimha Dwadashi 2026)
नरसिंह द्वादशी का आध्यात्मिक महत्व
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भक्त की रक्षा का प्रतीक
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बुराई पर अच्छाई की जीत
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होली पर्व की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि
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परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद















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