Mokshada Ekadashi 2025: मोक्षदा एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और फलदायी तिथि मानी जाती है। प्रत्येक माह दो एकादशियां आती हैं—एक कृष्ण पक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष में, लेकिन मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस व्रत को विधि-विधान से करने पर जीवन के दुख दूर होते हैं और मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भगवान विष्णु की प्रिय मानी जाने वाली तुलसी का इस दिन विशेष महत्व है। मान्यता है कि व्रत का पूर्ण फल पाने के लिए तुलसी से संबंधित नियमों का पालन आवश्यक है। ऐसा न करने पर व्रत का प्रभाव कम हो सकता है और शुभ फल अधूरा रह जाता है।
मोक्षदा एकादशी 2025 कब है?
शुभ तिथि और पूजा का सही समय
✔ मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी
✔ भगवान विष्णु की आराधना का विशेष अवसर
✔ व्रत रखने से पापों का क्षय और मोक्ष की प्राप्ति
मोक्ष और विष्णु कृपा क्यों दिलाती है यह एकादशी?
धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक लाभ
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जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं
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घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है
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मानसिक शांति प्राप्त होती है
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पूर्व जन्मों के पाप नष्ट होते हैं
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मृतात्माओं की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है
मोक्षदा एकादशी पर तुलसी से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
व्रत का पूरा फल पाने के लिए ज़रूरी नियम
1. तुलसी को जल अर्पित न करें
मान्यता है कि एकादशी के दिन माता तुलसी स्वयं भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, इसलिए इस दिन उन्हें जल चढ़ाना वर्जित माना गया है।
2. तुलसी का पात्र न हटाएं
तुलसी का गमला हटाना या स्थान बदलना इस दिन अशुभ माना जाता है। इससे व्रत का पुण्य क्षीण हो सकता है। (Mokshada Ekadashi 2025)
3. तुलसी के आसपास सफाई रखें
तुलसी के पास ये चीजें न रखें—
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जूते-चप्पल
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झाड़ू
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कूड़ेदान
माना जाता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी अप्रसन्न हो सकती हैं, जिससे आर्थिक बाधाएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
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4. तुलसी को न तोड़ें और न छुएं
एकादशी पर तुलसी को छूना वर्जित है, लेकिन…
- शाम के समय— घी का दीपक जलाना
- 7 या 11 बार परिक्रमा
- तुलसी मंत्र जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
5. विष्णु भोग में तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं
भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है। भोग में तुलसी दल चढ़ाने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।















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