Medieval India: मुगल काल को अक्सर धार्मिक नीतियों और दरबारी परंपराओं के संदर्भ में याद किया जाता है। आम धारणा यह है कि कट्टर इस्लामी छवि वाले औरंगज़ेब ने ज्योतिष और मुहूर्त जैसी परंपराओं से दूरी बनाई होगी। लेकिन इतिहास के कई स्रोत बताते हैं कि राजकीय निर्णयों में ज्योतिष की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। तो क्या सचमुच औरंगज़ेब को ज्योतिष पर भरोसा था? आइए, ऐतिहासिक संदर्भों के साथ समझते हैं।
मुगल दरबार में ज्योतिष: आस्था नहीं, सत्ता की रणनीति
- मुगल दरबार केवल प्रशासनिक केंद्र नहीं था, बल्कि प्रतीकों और रस्मों का मंच भी था।
- राजा का राज्याभिषेक, युद्ध-प्रस्थान, सार्वजनिक दर्शन—इन सबका राजनीतिक संदेश होता था।
- मध्यकालीन इतिहासकार Ziauddin Barani ने अपनी कृति तारीख-ए-फिरोजशाही में लिखा है कि उस दौर में कोई भी बड़ा कार्य ज्योतिषीय सलाह के बिना नहीं होता था।
- यह टिप्पणी सीधे औरंगज़ेब पर नहीं है, लेकिन यह उस समय के सामाजिक माहौल को स्पष्ट करती है।
राज्याभिषेक का सटीक मुहूर्त: मिनटों में तय हुआ समय
- इतिहासकार Jadunath Sarkar ने अपनी पुस्तक The History of Aurangzib में उल्लेख किया है कि औरंगज़ेब के औपचारिक राज्याभिषेक (5 जून 1659, दिल्ली) के लिए ज्योतिषियों ने सटीक समय निर्धारित किया था।
- बताया जाता है कि सूर्योदय के तीन घंटे 15 मिनट बाद का मुहूर्त चुना गया। सही समय आने पर पर्दे के पीछे बैठे सम्राट को संकेत दिया गया और वे गद्दी पर आसीन हुए।
- यह तथ्य दर्शाता है कि कम-से-कम राजकीय वैधता के सबसे महत्वपूर्ण क्षण में ज्योतिषीय गणना को महत्व दिया गया।
दक्षिण कूच से पहले भी तय हुआ शुभ समय
- दक्कन अभियानों के दौरान समय और मौसम बेहद अहम थे। फ्रांसीसी यात्री Francois Bernier ने अपने वृत्तांत में लिखा है कि
- औरंगज़ेब ने 6 दिसंबर 1664 को दोपहर तीन बजे दक्षिण की ओर कूच किया—और यह समय भी ज्योतिषीय सलाह के आधार पर चुना गया था।
- लंबी सैन्य यात्रा के लिए शुभ मुहूर्त तय करना सैनिकों और दरबारियों के मनोबल का हिस्सा माना जाता था।
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क्या औरंगज़ेब अंधविश्वासी था?
- इतिहास को एकरेखीय नजर से नहीं देखा जा सकता।
- औरंगज़ेब ने कई दरबारी रस्मों को सीमित किया, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि
- उन्होंने ज्योतिष को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया।
- प्रो. Mohammad Mujeeb ने अपनी पुस्तक The Indian Muslims में उल्लेख किया है कि
- मुस्लिम समाजों में भी शकुन-अपशकुन और चमत्कारों पर विश्वास का चलन था।
- यानी धार्मिक रूढ़िवाद और ज्योतिषीय परंपराएं साथ-साथ मौजूद थीं। (Medieval India)
हुमायूं से शाहजहां तक: मुगल और ज्योतिष
मुगल इतिहास में ज्योतिष का प्रभाव केवल औरंगज़ेब तक सीमित नहीं था।
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Humayun ने निर्वासन के समय भी जन्म-समय दर्ज कराने के लिए ज्योतिषी नियुक्त किए थे।
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Akbar के जन्म और राज्य संबंधी निर्णयों में भी ज्योतिषीय संदर्भ मिलते हैं।
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Shah Jahan के काल में भी दरबार में ज्योतिषियों की भूमिका बनी रही।
पत्रकार M. J. Akbar ने अपनी पुस्तक After Mecca: Astrology in the Mughal Empire में मुगल शासन में ज्योतिष के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण किया है।














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