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Marital Dispute: पत्नी से खर्च का हिसाब मांगना अपराध है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने 498A पर दिया साफ फैसला…

Marital Dispute: पत्नी से खर्च का हिसाब मांगना अपराध है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने 498A पर दिया साफ फैसला...

Marital Dispute: क्या पति का पत्नी से घर के खर्च का हिसाब मांगना, उसे खर्चों की लिस्ट या एक्सेल शीट बनाने को कहना कानूनी अपराध है? क्या ऐसे मामलों में पति पर IPC की धारा 498A (क्रूरता) के तहत केस चल सकता है? इस अहम सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और स्पष्ट फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला क्या कहता है?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि केवल खर्च का हिसाब मांगना, आर्थिक नियंत्रण रखना या खर्चों का रिकॉर्ड रखने को कहना अपने आप में आपराधिक क्रूरता नहीं है, जब तक यह साबित न हो कि इससे पत्नी को मानसिक या शारीरिक रूप से गंभीर नुकसान पहुंचा हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर घरेलू विवाद या असहमति को 498A जैसे गंभीर आपराधिक कानून के तहत नहीं लाया जा सकता।

कब और किस बेंच ने दिया फैसला?

  • यह फैसला 19 दिसंबर 2025 को जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सुनाया।
  • कोर्ट ने एक पति के खिलाफ दर्ज 498A और दहेज उत्पीड़न का मामला पूरी तरह रद्द कर दिया।

पूरा मामला क्या था?

  • पति और पत्नी दोनों अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे

  • शादी 2016 में हुई

  • 2019 में बेटे का जन्म हुआ

  • आपसी विवाद के बाद पत्नी बच्चे को लेकर भारत आ गई

  • जनवरी 2022 में पति ने साथ रहने के लिए कानूनी नोटिस भेजा

  • इसके बाद पत्नी ने पति और ससुराल वालों पर 498A और दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज कराया

पत्नी ने क्या आरोप लगाए थे?

पत्नी ने आरोप लगाया कि:

  • पति खर्च का पूरा हिसाब मांगता था

  • एक्सेल शीट में खर्च लिखने को कहता था

  • अपने माता-पिता को पैसे भेजता था

  • गर्भावस्था के दौरान भावनात्मक सहयोग नहीं किया

  • वजन बढ़ने को लेकर ताने मारे (Marital Dispute)

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सुप्रीम कोर्ट ने आरोप क्यों खारिज किए?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

  • ये आरोप सामान्य वैवाहिक विवाद की श्रेणी में आते हैं

  • इनमें कोई ठोस घटना, तारीख या सबूत नहीं दिया गया

  • दहेज मांगने का आरोप बिना प्रमाण का था

कोर्ट ने साफ कहा कि 498A का इस्तेमाल बदले या निजी रंजिश के लिए नहीं किया जा सकता

हर गलत व्यवहार अपराध नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा:

  • पति का व्यवहार असंवेदनशील या गलत हो सकता है

  • लेकिन हर गलत या रूखा व्यवहार आपराधिक क्रूरता नहीं बन जाता

  • भारत में कई घरों में पुरुष आर्थिक फैसले लेते हैं, लेकिन सिर्फ इसी आधार पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता

अंतिम फैसला क्या रहा?

सुप्रीम कोर्ट ने:

  • पति के खिलाफ दर्ज FIR और आपराधिक केस पूरी तरह रद्द कर दिया

  • कहा कि खर्च का हिसाब मांगना, जब तक गंभीर उत्पीड़न साबित न हो, अपराध नहीं है

इस फैसले का क्या मतलब है?

यह फैसला उन मामलों में बेहद अहम है जहां:

  • घरेलू विवाद को सीधे आपराधिक रंग दे दिया जाता है

  • 498A जैसे कानून के दुरुपयोग के आरोप लगते हैं

कोर्ट ने संतुलन बनाते हुए साफ किया कि महिलाओं की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन कानून का दुरुपयोग भी स्वीकार्य नहीं

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