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Islamic Month 2026: सहरी, इफ्तार और तरावीह क्या है? जानिए क्यों इबादत का सबसे पाक महीना है रमजान

Islamic Month 2026: सहरी, इफ्तार और तरावीह क्या है? जानिए क्यों इबादत का सबसे पाक महीना है रमजान

Islamic Month 2026: आज से पवित्र महीना रमजान शुरू हो चुका है और दुनिया भर के मुसलमानों ने पहला रोजा रखा। इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना रमजान सबसे मुकद्दस (पवित्र) माना जाता है। इस पूरे महीने रोजा, नमाज, कुरान की तिलावत और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। आइए विस्तार से समझते हैं — सहरी, इफ्तार और तरावीह क्या हैं और रमजान का आध्यात्मिक महत्व क्या है।

क्यों खास है रमजान का महीना?

इस्लाम धर्म के अनुसार, इसी पवित्र महीने में पैगंबर हजरत मुहम्मद पर पवित्र ग्रंथ कुरान शरीफ का अवतरण हुआ था। रमजान को सब्र (धैर्य), संयम, आत्मशुद्धि और इंसानियत का महीना कहा जाता है।

  • सूर्योदय से पहले से सूर्यास्त तक रोजा रखा जाता है

  • झूठ, गुस्सा और बुरे कर्मों से दूर रहने की सीख दी जाती है

  • इस महीने में की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है

क्या होती है सहरी (Suhoor)?

सहरी वह भोजन है जो रोजेदार फज्र की अजान से पहले करते हैं।

  • सहरी का समय सूर्योदय से पहले तक होता है

  • सहरी के बाद रोजा शुरू हो जाता है

  • दिनभर न कुछ खाया जाता है और न पानी पिया जाता है

सहरी का उद्देश्य शरीर को ऊर्जा देना है, ताकि रोजेदार पूरे दिन इबादत और संयम के साथ रोजा रख सके।

इफ्तार क्या है?

यह सूर्यास्त के बाद रोजा खोलने का समय होता है।

  • मग़रिब की अजान के साथ रोजा खोला जाता है

  • परंपरागत रूप से खजूर और पानी से इफ्तार किया जाता है

  • इसके बाद नमाज और फिर भोजन किया जाता है

इफ्तार भाईचारे, एकता और मोहब्बत का प्रतीक भी है। कई जगहों पर सामूहिक इफ्तार का आयोजन होता है, जहां लोग मिलकर रोजा खोलते हैं। (Islamic Month 2026)

तरावीह की नमाज क्या होती है?

यह एक विशेष नमाज है जो रमजान में ईशा की नमाज के बाद अदा की जाती है।

  • यह नमाज केवल रमजान में पढ़ी जाती है

  • इसमें कुरान शरीफ की तिलावत की जाती है

  • कई मस्जिदों में पूरे महीने में पूरा कुरान पढ़ा जाता है

तरावीह का मकसद अल्लाह की इबादत में अधिक समय देना और आत्मिक शांति प्राप्त करना है।

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रमजान का असली संदेश

रमजान सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम और आध्यात्मिक सुधार का महीना है।

  • गुस्से पर नियंत्रण
  • जरूरतमंदों की मदद (जकात और सदका)
  • नमाज और दुआ में अधिक समय
  • बुराइयों से दूरी

इसीलिए रमजान को रहमत (कृपा), बरकत (आशीर्वाद) और मगफिरत (माफी) का महीना कहा जाता है।

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