Investment Strategy 2026: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव के बाद वैश्विक बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों की खबरों से निवेशकों में घबराहट बढ़ी और शेयर बाजार लाल निशान में खुला। हालांकि, इस गिरावट के बीच सोना और चांदी ETF में निवेश करने वालों को जोरदार फायदा हुआ। ऐसे में बड़ा सवाल है—क्या अब शेयर बेचकर गोल्ड और सिल्वर ETF में पैसा लगाना चाहिए?
शेयर बाजार गिरा, लेकिन बुलियन ETF चमके
2 मार्च को बाजार खुलते ही BSE Sensex और NIFTY 50 में करीब 1.4% की गिरावट दर्ज की गई। इसके उलट, सिल्वर ETF में जबरदस्त उछाल आया:
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Angel One Silver ETF में लगभग 9% की तेजी
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Tata Silver ETF, ICICI Prudential Silver ETF और Axis Silver ETF में 6% से ज्यादा उछाल
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SBI Silver ETF और HDFC Silver ETF में 5–6% की मजबूती
सोने के ETF भी 3–4% ऊपर कारोबार करते नजर आए।
MCX पर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सोना-चांदी
बुलियन बाजार में तेजी का असर सीधे ETF पर दिखा।
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Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर सोना 2.91% बढ़कर 1,66,816 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
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चांदी 2.61% की तेजी के साथ 2,90,188 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंची।
जब भी भू-राजनीतिक संकट गहराता है, निवेशक जोखिम वाले एसेट से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि सोना-चांदी को “सेफ हेवन” माना जाता है।
संकट के समय क्यों चमकता है सोना?
इतिहास बताता है कि:
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युद्ध या आर्थिक अनिश्चितता में सोना मजबूत प्रदर्शन करता है
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महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ यह सुरक्षा देता है
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ETF के जरिए निवेश करने पर फिजिकल गोल्ड रखने की जरूरत नहीं
हालांकि, चांदी की चाल थोड़ी अलग होती है। यह सुरक्षित निवेश तो है, लेकिन इंडस्ट्रियल मांग ज्यादा होने से इसमें उतार-चढ़ाव भी तेज होता है। युद्ध के समय इसकी तेजी ज्यादा आक्रामक हो सकती है। (Investment Strategy 2026)
अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों के मुताबिक:
- घबराकर शेयर बेचने से बचें
- एसेट एलोकेशन का संतुलन बनाए रखें
- पोर्टफोलियो में शेयर, डेब्ट और गोल्ड का संतुलित मिश्रण रखें
- इमरजेंसी फंड अलग रखें
तेजी देखकर पूरी रकम सोना-चांदी ETF में लगाना जोखिम भरा हो सकता है। इनका इस्तेमाल पोर्टफोलियो के जोखिम को कम करने और स्थिरता बढ़ाने के लिए करें।
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