Indian Economy: Budget 2026 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करेंगी। उससे पहले केंद्र सरकार ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में बड़ा संकेत देते हुए अगले तीन वर्षों के लिए 852 इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रूपरेखा तैयार कर ली है। खास बात यह है कि ये सभी प्रोजेक्ट्स Public-Private Partnership (PPP) मॉडल के तहत होंगे, जिनकी कुल अनुमानित लागत 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
इंफ्रा सेक्टर में आएगा बड़ा बूम
सरकार के इस मेगा प्लान से देश में—
-
बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
-
इकोनॉमी और शेयर बाजार को मजबूती
-
लाखों की संख्या में नई नौकरियां
पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह योजना निवेशकों और निजी कंपनियों के लिए भी बड़े अवसर खोलती है।
तीन साल की PPP पाइपलाइन कैसे तैयार हुई?
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) ने बताया कि यह तीन वर्षीय PPP पाइपलाइन वित्त वर्ष 2025-26 से लागू होगी।
इसका उद्देश्य संभावित PPP परियोजनाओं की शुरुआती जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि निवेशक और डेवलपर्स स्मार्ट और सोच-समझकर निवेश निर्णय ले सकें।
केंद्र और राज्यों के बीच कैसे बंटे प्रोजेक्ट्स?
-
केंद्र सरकार:
-
232 PPP प्रोजेक्ट्स
-
अनुमानित खर्च: 13.15 लाख करोड़ रुपये
-
-
राज्य और केंद्र शासित प्रदेश:
-
620 प्रोजेक्ट्स
-
अनुमानित खर्च: 3.84 लाख करोड़ रुपये
-
कुल 20 राज्य और UTs शामिल
-
किस मंत्रालय के पास कितने प्रोजेक्ट्स?
केंद्र सरकार के तहत सबसे बड़ा हिस्सा इन मंत्रालयों का है—
-
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
-
108 प्रोजेक्ट्स
-
लागत: 8.76 लाख करोड़ रुपये
-
-
बिजली मंत्रालय
-
46 प्रोजेक्ट्स
-
लागत: 3.40 लाख करोड़ रुपये
-
-
रेल मंत्रालय
-
13 प्रोजेक्ट्स
-
लागत: 30,904 करोड़ रुपये (Indian Economy)
-
-
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग
-
29 प्रोजेक्ट्स
-
लागत: 12,254 करोड़ रुपये
-
-
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
-
लागत: 8,743 करोड़ रुपये
-
-
नागर विमानन मंत्रालय
-
11 प्रोजेक्ट्स
-
लागत: 2,262 करोड़ रुपये
-
Also Read- Anti Trust India: टाटा से सेल तक… स्टील दिग्गजों पर जांच की आंच, बड़े खेल का पर्दाफाश, CCI ने स्टील कंपनियों पर लगाया एंटीट्रस्ट उल्लंघन का आरोप…
राज्यों में किसे मिला सबसे बड़ा हिस्सा?
राज्यों में PPP परियोजनाओं के मामले में—
-
आंध्र प्रदेश
-
270 प्रोजेक्ट्स
-
अनुमानित खर्च: 1.16 लाख करोड़ रुपये
-
-
तमिलनाडु
-
70 प्रोजेक्ट्स
-
अनुमानित खर्च: 87,640 करोड़ रुपये
-
क्या है सरकार का मकसद?
सरकार इस मेगा इंफ्रा प्लान के जरिए—
- निजी निवेश को बढ़ावा देना
- लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को सपोर्ट करना
- ‘विकसित भारत’ के विजन को जमीन पर उतारना
चाहती है।












Leave a Reply