“मैं जानूं था उसके अंदर… झकझोर समंदर बहता है,
जो लहर थपेड़ों से जूझे और लहर थपेड़े सहता है…”
— पीयूष मिश्रा
Happy Birthday Piyush Mishra: हिंदी सिनेमा और थिएटर की दुनिया में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो सिर्फ किरदार नहीं निभाते, बल्कि उन्हें अमर बना देते हैं। मंच हो, कैमरा हो या काग़ज़—जहां भी पीयूष मिश्रा मौजूद होते हैं, वहां कला सांस लेने लगती है। आज यानी 13 जनवरी को इस बहुआयामी कलाकार का जन्मदिन है। आइए जानते हैं उस सफर को, जिसमें प्रियाकांत शर्मा से पीयूष मिश्रा बनने की कहानी छिपी है।
प्रियाकांत शर्मा से पीयूष मिश्रा बनने की कहानी
पीयूष मिश्रा का जन्म 13 जनवरी 1963 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। उनका जन्म नाम प्रियाकांत शर्मा था। पिता प्रताप कुमार शर्मा ने उन्हें अपनी निःसंतान बहन तारादेवी मिश्रा को गोद दे दिया, जिसके बाद उनका नाम बदलकर पीयूष मिश्रा हो गया। हालांकि जन्म ग्वालियर में हुआ, लेकिन उनकी परवरिश संभल में हुई। बचपन से ही पीयूष जिद्दी, संवेदनशील और सवाल पूछने वाले इंसान थे। आठवीं कक्षा में लिखी गई उनकी कविता “जिंदा हो हां तुम कोई शक नहीं…” उनके स्वभाव और सोच की झलक देती है। दसवीं में उन्होंने ग्वालियर हाईकोर्ट में अर्जी देकर कानूनी तौर पर अपना नाम बदलवाया और यहीं से शुरू हुई एक नए कलाकार की यात्रा।
NSD ने बदली जिंदगी, थिएटर बना पहचान
थिएटर के प्रति उनका झुकाव पहले से था, लेकिन किसी ने सलाह दी कि नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) जाएं। साल 1983 में पीयूष दिल्ली पहुंचे और NSD में दाखिला लिया। यहीं उनकी मुलाकात मंच से हुई उस कला से, जिसने उन्हें भीतर तक बदल दिया। 1986 में ग्रेजुएशन पूरा किया सेकेंड ईयर में ही जर्मन निर्देशक फ्रिट्स बेनीविट्स ने उन्हें हैमलेट में कास्ट किया यहीं से पीयूष मिश्रा एक गंभीर और समर्पित कलाकार के रूप में उभरने लगे।
थिएटर, टीवी और मुंबई का संघर्ष
1990 में पीयूष मिश्रा ने आशीष विद्यार्थी, मनोज बाजपेयी, गजराज राव और निर्देशक एन. के. शर्मा के साथ थिएटर ग्रुप ‘एक्ट वन’ की स्थापना की। उनका लिखा नाटक ‘गगन दमामा बाज्यो’ उन्हें थिएटर की दुनिया में पहचान दिलाने वाला साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने अस्मिता थिएटर ग्रुप जॉइन किया और ‘An Evening With Piyush Mishra’ जैसा चर्चित सिंगल मैन शो किया। (Happy Birthday Piyush Mishra)
1989 में मुंबई पहुंचकर उन्होंने टीवी में काम किया, जहां
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भारत एक खोज (श्याम बेनेगल)
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राजधानी (तिग्मांशु धूलिया)
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किले का रहस्य
जैसे शोज़ का हिस्सा बने।
‘दिल से…’ से बॉलीवुड में एंट्री
साल 1998 में पीयूष मिश्रा ने मणिरत्नम की फिल्म ‘दिल से…’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने:
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द लेजेंड ऑफ भगत सिंह (स्क्रीनराइटर)
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ब्लैक फ्राइडे
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मकबूल
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गुलाल
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गैंग्स ऑफ वासेपुर
जैसी फिल्मों से खुद को एक पावरफुल अभिनेता और लेखक के रूप में स्थापित किया। विशाल भारद्वाज और अनुराग कश्यप के साथ उनका सहयोग उनके करियर के सबसे यादगार अध्यायों में से एक रहा।
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सिंगर और लेखक के रूप में भी बेमिसाल
पीयूष मिश्रा सिर्फ अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक शानदार कवि, लेखक और सिंगर भी हैं।
किताबें और कविता संग्रह
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तुम्हारी औकात क्या है… पीयूष मिश्रा (आत्मकथा)
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कुछ इश्क किया कुछ काम किया
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आरंभ है प्रचंड
यादगार गाने
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आरंभ है प्रचंड (गुलाल)
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इक बगल में चांद होगा (गैंग्स ऑफ वासेपुर)
आज भी पीयूष मिश्रा अपने लाइव शोज़ और स्टोरीटेलिंग से दुनिया भर में दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हैं।
पीयूष मिश्रा: एक चलता-फिरता साहित्य और सिनेमा
पीयूष मिश्रा उन कलाकारों में से हैं, जो ट्रेंड नहीं बनाते, बल्कि परंपरा रचते हैं। उनकी मौजूदगी हिंदी सिनेमा और साहित्य दोनों को समृद्ध करती है। हमारी ओर से इस सदाबहार कलाकार को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।















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