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Gotra System: एक ही गोत्र में विवाह क्यों वर्जित है? जानिए धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक कारण…

Gotra System: एक ही गोत्र में विवाह क्यों वर्जित है? जानिए धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक कारण...

Gotra System: हिंदू धर्म में विवाह को जीवन के 16 संस्कारों में से एक माना गया है। यह सिर्फ दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और परंपराओं का पवित्र बंधन होता है। विवाह तय करते समय कुंडली मिलान के साथ-साथ गोत्र का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। ऐसे में सवाल उठता है—एक ही गोत्र में विवाह क्यों नहीं किया जाता? क्या इससे सच में जीवन में परेशानियां आती हैं? आइए विस्तार से समझते हैं।

गोत्र क्या होता है?

गोत्र का शाब्दिक अर्थ होता है वंश या कुल। प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों के वंशजों को अलग-अलग गोत्रों में विभाजित किया गया था। हर गोत्र किसी एक ऋषि के नाम से जाना जाता है, जैसे—

  • कश्यप गोत्र

  • भारद्वाज गोत्र

  • गौतम गोत्र

एक ही गोत्र के लोगों को एक ही पूर्वज का वंशज माना जाता है, यानी उनमें रक्त संबंध होने की मान्यता होती है।

धार्मिक मान्यता: एक गोत्र में विवाह क्यों वर्जित है?

हिंदू शास्त्रों के अनुसार,

  • एक ही गोत्र के स्त्री-पुरुष भाई-बहन समान माने जाते हैं

  • ऐसे में एक गोत्र में विवाह को ऋषि परंपरा का उल्लंघन माना गया है

मान्यता है कि समान गोत्र में विवाह करने से विवाह दोष लगता है, जिससे दांपत्य जीवन में कलह, संतान सुख में बाधा और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

संतान से जुड़ी मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,

  • एक ही गोत्र में विवाह से जन्मी संतान में

    • शारीरिक कमजोरी

    • मानसिक असंतुलन

    • रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी
      होने की आशंका बताई गई है।
      इसी वजह से प्राचीन काल से इस परंपरा का पालन किया जाता रहा है।

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण से क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विज्ञान भी इस विषय में धार्मिक मान्यताओं का समर्थन करता है।
जेनेटिक्स (Genetics) के अनुसार—

  • एक ही कुल या नजदीकी रक्त संबंधों में विवाह से

  • संतान में आनुवंशिक (Genetic) बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है

इसे Inbreeding कहा जाता है, जिसमें जीन में विविधता कम हो जाती है और इससे जन्म दोषों की संभावना बढ़ती है। (Gotra System)

क्या आज के समय में भी ये नियम लागू हैं?

आज भी भारत के अधिकांश हिंदू समाजों में गोत्र मिलान को अनिवार्य माना जाता है। हालांकि कुछ समुदायों में अलग-अलग परंपराएं भी देखने को मिलती हैं, लेकिन धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टि से अलग गोत्र में विवाह को ही सुरक्षित और श्रेष्ठ माना गया है।

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