Education Policy: टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को लेकर देशभर के लाखों शिक्षकों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के फैसले के बाद सभी शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया गया था, जिससे लंबे समय से सेवा दे रहे गैर-TET शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे थे।
अब केंद्र सरकार की नई पहल से राहत की उम्मीद जगी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से क्यों बढ़ी चिंता?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 8) के सभी शिक्षकों को TET/CTET पास करना अनिवार्य किया गया।
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जो शिक्षक वर्षों से पढ़ा रहे हैं लेकिन TET पास नहीं कर पाए
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वे मानसिक दबाव और नौकरी की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं
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शिक्षक संगठनों ने इसे व्यावहारिक रूप से कठिन बताया
केंद्र सरकार का बड़ा कदम: राज्यों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने सभी राज्यों को निर्देश जारी करते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
राज्यों से मांगी गई जानकारी:
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वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की संख्या
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2011 के बाद नियुक्त शिक्षकों का विवरण
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कितने शिक्षकों ने TET/CTET पास किया
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कितने शिक्षक अब तक TET पास नहीं कर पाए
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शिक्षकों की आयु, शैक्षणिक योग्यता और प्रशिक्षण स्थिति
राज्यों को यह जानकारी 16 जनवरी तक केंद्र को सौंपनी होगी। इसके लिए 31 दिसंबर को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को आधिकारिक पत्र भेजा गया।
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लाखों शिक्षकों को मिल सकती है बड़ी राहत
केंद्र सरकार की इस पहल से देशभर में करीब 12 लाख गैर-TET शिक्षकों को राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
राज्यवार अनुमानित आंकड़े:
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उत्तर प्रदेश: 1.86 लाख शिक्षक
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राजस्थान: लगभग 80 हजार थर्ड ग्रेड शिक्षक
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मध्य प्रदेश: करीब 3 लाख शिक्षक
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झारखंड: 27 हजार से अधिक प्राथमिक शिक्षक
इन शिक्षकों के भविष्य को लेकर अब केंद्र सरकार कोई बड़ा निर्णय ले सकती है। (Education Policy)
सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए थे?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक:
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गैर-TET शिक्षकों को 2 साल के भीतर TET पास करना होगा
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ऐसा न करने पर सेवा समाप्त या अनिवार्य सेवानिवृत्ति संभव
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जिन शिक्षकों की सेवा अवधि में 5 साल से कम समय बचा है, उन्हें आंशिक राहत दी गई
CTET 2026 में रिकॉर्ड आवेदन
TET अनिवार्यता के डर के चलते 8 फरवरी 2026 को होने वाली CTET परीक्षा में रिकॉर्ड आवेदन आए हैं।
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इस बार 25 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया
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इससे साफ है कि शिक्षक अपने भविष्य को लेकर गंभीर हैं
आगे क्या फैसला आ सकता है?
अब सभी की नजरें:
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केंद्र सरकार की रिपोर्ट समीक्षा पर
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राज्यों की सिफारिशों पर
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और सुप्रीम कोर्ट के आदेश में संभावित संशोधन पर टिकी हैं
अगर केंद्र सरकार राहत का रास्ता निकालती है, तो यह फैसला शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों दोनों के लिए ऐतिहासिक हो सकता है।














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