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Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti 2026: छत्रपति शिवाजी महाराज के कितने दुश्मन थे? जानें रंजिश और संघर्ष की पूरी कहानी…

Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti 2026: छत्रपति शिवाजी महाराज के कितने दुश्मन थे? जानें रंजिश और संघर्ष की पूरी कहानी...

Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti 2026: Chhatrapati Shivaji Maharaj (1630-1680) भारतीय इतिहास के महान योद्धा और दूरदर्शी शासक थे, जिन्होंने 17वीं शताब्दी में हिंदवी स्वराज्य की नींव रखी। आम धारणा यह है कि उनका संघर्ष केवल मुगलों से था, लेकिन ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि उनके सामने कई शक्तिशाली दुश्मन थे। शिवाजी महाराज की 397वीं जयंती पर आइए जानते हैं—मुगलों के अलावा उनके कितने शत्रु थे और इन संघर्षों के पीछे असली कारण क्या थे?

बीजापुर की आदिलशाही से प्रारंभिक संघर्ष

दक्कन में उस समय Adilshahi Sultanate एक बड़ी शक्ति थी। शिवाजी के पिता शाहजी भोसले इसी सल्तनत की सेवा में थे।
  • शिवाजी ने आदिलशाही के किलों पर कब्जा करना शुरू किया।

  • इससे टकराव तेज हुआ।

  • अफजल खान के साथ प्रतापगढ़ की ऐतिहासिक भिड़ंत इसी संघर्ष का हिस्सा थी।

यह लड़ाई धार्मिक कम और क्षेत्रीय नियंत्रण व सत्ता विस्तार अधिक थी।

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मुगलों और औरंगजेब से सीधा टकराव

मुगल सम्राट Aurangzeb की दक्कन नीति ने संघर्ष को और तेज कर दिया।
मुख्य घटनाएं:
  • शाइस्ता खान पर 1663 में पुणे में साहसिक हमला

  • 1665 में पुरंदर की संधि

  • 1666 में आगरा में नजरबंदी और साहसिक पलायन

मुगल साम्राज्य दक्कन पर पूर्ण नियंत्रण चाहता था, जबकि शिवाजी स्वतंत्र मराठा राज्य की स्थापना के लिए संघर्ष कर रहे थे। (Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti 2026)

जंजीरा के सिद्दी शासकों से समुद्री संघर्ष

कोंकण तट पर जंजीरा के सिद्दी समुद्री शक्ति थे।
  • शिवाजी ने मजबूत नौसेना बनाई

  • सिंधुदुर्ग और विजयदुर्ग जैसे किलों का विकास किया

  • जंजीरा किले को जीतने का प्रयास किया

यह संघर्ष समुद्री प्रभुत्व और व्यापारिक मार्गों के नियंत्रण को लेकर था।

पुर्तगाली और यूरोपीय शक्तियों से टकराव

पश्चिमी तट पर Portuguese Empire, अंग्रेज और डच व्यापारी सक्रिय थे।
  • 1664 और 1670 में सूरत पर हमला

  • व्यापारिक संसाधनों पर नियंत्रण

  • कभी समझौता, कभी संघर्ष

इन अभियानों का उद्देश्य आर्थिक मजबूती और मुगल प्रतिष्ठा को चुनौती देना था।

आंतरिक मराठा सरदारों से विरोध

शिवाजी को केवल बाहरी शत्रुओं का सामना नहीं करना पड़ा।

  • जावली के मोरे

  • सावंतवाड़ी के सरदार

  • अन्य स्थानीय नायक

कई सरदार अपनी स्वायत्तता बनाए रखना चाहते थे, जबकि शिवाजी केंद्रीकृत मराठा सत्ता स्थापित करना चाहते थे।

गोलकुंडा की कुतुबशाही से सामरिक संबंध

Qutb Shahi dynasty से संबंध अपेक्षाकृत संतुलित रहे।

  • 1677-78 के दक्षिण अभियान में सहयोग मिला

  • यह पूर्ण मित्रता नहीं, बल्कि सामरिक संतुलन था

संघर्षों के असली कारण क्या थे?

इतिहासकारों के अनुसार शिवाजी के युद्धों के पीछे मुख्य कारण थे:

  • स्वराज्य की स्थापना
  • किलों और भू-क्षेत्र पर नियंत्रण
  • आर्थिक संसाधनों की मजबूती
  • समुद्री सुरक्षा
  • राजनीतिक वैधता

धार्मिक कारणों को अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है, जबकि शिवाजी की नीति व्यावहारिक और समावेशी थी। उनके प्रशासन में मुस्लिम अधिकारी भी उच्च पदों पर थे।

1674 का राज्याभिषेक: वैधता की घोषणा

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