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Chakhna History in India: शराब के साथ चखना क्यों बन गया ज़रूरी? जानिए इसकी शुरुआत, इतिहास और अलग-अलग नाम…

Chakhna History in India: शराब के साथ चखना क्यों बन गया ज़रूरी? जानिए इसकी शुरुआत, इतिहास और अलग-अलग नाम...

Chakhna History in India: शराब के साथ थोड़ा-सा खाने का चलन आज आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह परंपरा शुरू कैसे हुई? भारत में जिसे हम चखना कहते हैं, वही दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग नामों और स्वादों के साथ मौजूद है. इसका मकसद सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि शराब के स्वाद को संतुलित करना, उसका असर हल्का रखना और महफ़िल को ज़्यादा दिलचस्प बनाना होता है.

चखना क्या है और क्यों जरूरी माना जाता है?

चखना दरअसल छोटे-छोटे स्नैक्स या व्यंजनों का समूह होता है, जिसे शराब के साथ खाया जाता है.

  • यह शराब की तीव्रता को संतुलित करता है

  • नमक, मसाले और खट्टापन प्यास व स्वाद दोनों बढ़ाते हैं

  • लंबी बैठकी में शरीर पर शराब का असर थोड़ा नियंत्रित रहता है

समाजशास्त्रियों के अनुसार, जहां भी शराब पीने की सामूहिक संस्कृति होती है, वहां साथ में खाने की परंपरा अपने-आप विकसित हो जाती है.

शराब के साथ चखने का चलन कैसे शुरू हुआ?

भारत में वैदिक काल से सुरा और मदिरा का उल्लेख मिलता है, लेकिन आधुनिक चखना संस्कृति 20वीं सदी के मध्य में तेज़ी से उभरी. ब्रिटिश शासन के दौरान क्लब और बार कल्चर आया, जहां शराब के साथ सैंडविच, कटलेट और रोस्ट मीट परोसे जाते थे. आजादी के बाद भारतीय स्वाद के अनुसार इसमें समोसा, पकौड़ा, चना, मूंगफली जैसे देसी विकल्प जुड़ते गए.

1950-70 के दशक में शहरों में बार और रेस्टोरेंट बढ़े, वहीं देसी ठेकों ने सस्ते और आसान चखने को लोकप्रिय बनाया—जैसे नमक लगी मूंगफली, चना-जोर-गरम और प्याज़. 1990 के बाद पब-लाउंज कल्चर के साथ चखना फ्यूज़न बन गया और अब इसे एक क्यूलिनरी एक्सपीरियंस की तरह देखा जाने लगा.

अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में चखना

  • स्पेन: Tapas

  • मिडिल ईस्ट: Mezze

  • भारत: Chakhna / Snacks / Sides

नाम अलग-अलग हैं, लेकिन मकसद एक ही—शराब के साथ हल्का, स्वादिष्ट खाना.

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भारत के अलग-अलग राज्यों में चखने के नाम और स्वाद

उत्तर भारत (दिल्ली, यूपी, पंजाब)

  • मूंगफली, भुने चने, प्याज़

  • तंदूरी चिकन, पनीर टिक्का, फिश अमृतसरी
    यहां आमतौर पर इसे चखना या स्नैक्स कहा जाता है.

पूर्व भारत (बंगाल, बिहार, झारखंड)

  • झालमूड़ी, फिश फ्राई, भूंजा
    यहां मछली और मसालेदार मिश्रण खास पहचान हैं. (Chakhna History in India)

पश्चिम भारत (महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान)

  • फरसाण, चिवड़ा, भड़ंग, सेव

  • तली मछली, झींगा फ्राई
    यहां नमकीन और फरसाण शब्द ज्यादा प्रचलित हैं.

दक्षिण भारत (आंध्र, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल)

  • मिर्ची भज्जी, चिकन/मटन फ्राई

  • फिश फ्राई, बीफ फ्राई, मसाला वड़ा
    अक्सर इन्हें साइड डिश या स्टार्टर कहा जाता है.

उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्य

  • स्मोक्ड मीट, सूखी सब्ज़ियां

  • तेल और मसालेदार व्यंजन, जो ठंड में शरीर को गर्म रखें.

चखना: स्वाद के साथ सेहत और समाज का सवाल

  • अधिकतर चखने तले-भुने और नमकीन होते हैं, जो ज्यादा सेवन पर सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं.
  • वहीं, महंगे बार में फ्यूज़न प्लेटर और देसी ठेकों पर सस्ती मूंगफली—यह चखना संस्कृति में वर्ग-भेद को भी दिखाता है.
  • फिर भी, चखना स्थानीय व्यंजनों को ज़िंदा रखने और सामाजिक मेल-जोल का अहम जरिया बना हुआ है.

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