Astro Tips: आपने अक्सर बुजुर्गों या आम बातचीत में यह कहावत सुनी होगी— “तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा”। कई लोग मानते हैं कि अगर कोई काम तीन लोग मिलकर करें तो वह सफल नहीं होता या उसमें रुकावट आ जाती है। यहां तक कि शुभ कार्यों में भी तीन लोगों को साथ भेजने से बचा जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई 3 अंक अशुभ होता है? या इसके पीछे सिर्फ सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं? आइए जानते हैं इस मान्यता की पूरी कहानी।
क्यों अशुभ माना जाता है 3 अंक?
भारतीय समाज में कई परंपराओं और मान्यताओं में 3 अंक को लेकर सावधानी बरती जाती है। जैसे—
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भोजन परोसते समय थाली में तीन रोटी न रखने की परंपरा
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पूजा-पाठ में तीन लोगों का साथ बैठना कई जगह वर्जित
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रिश्ता देखने के लिए तीन लोग एक साथ न जाना
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शुभ कार्य में अक्सर विषम या अधिक संख्या को प्राथमिकता
इन्हीं वजहों से आम धारणा बन गई कि 3 अंक अशुभ हो सकता है।
‘तीन तिगाड़ा काम बिगाड़ा’ कहावत के पीछे का तर्क
इस कहावत के पीछे ज्योतिष से ज्यादा व्यवहारिक सोच काम करती है।
मान्यता है कि:
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दो लोगों में तालमेल जल्दी बन जाता है
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तीन लोगों के बीच मतभेद या ईगो क्लैश की संभावना बढ़ जाती है
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निर्णय लेने में भ्रम और एकाग्रता की कमी आती है
यही कारण है कि पुराने समय में कहा गया कि तीन लोग मिलकर काम करें तो मामला उलझ सकता है। (Astro Tips)
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धार्मिक दृष्टि से क्या कहता है शास्त्र?
हैरानी की बात यह है कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से 3 अंक अशुभ नहीं बल्कि अत्यंत शुभ माना जाता है।
हिंदू धर्म में 3 अंक का महत्व:
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त्रिदेव – ब्रह्मा, विष्णु, महेश
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तीन वेदों का प्रतीक
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भगवान शिव का त्रिशूल – तीन भागों में विभाजित
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सत्व, रजस और तमस – तीन गुण
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, 3 अंक संतुलन, शक्ति और सृजन का प्रतीक है।
तो आखिर 3 अंक अशुभ है या नहीं?
निष्कर्ष यही निकलता है कि:
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लोक मान्यताओं और सामाजिक अनुभवों के कारण 3 अंक को अशुभ कहा गया
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धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से 3 अंक अत्यंत शुभ और शक्तिशाली है
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यह कहावत अधिकतर व्यवहारिक अनुभव पर आधारित है, न कि शास्त्रीय नियम पर















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