Anti Trust India: एक गोपनीय दस्तावेज़ के अनुसार, भारत के प्रतिस्पर्धा नियामक Competition Commission of India (CCI) ने देश की प्रमुख स्टील कंपनियों टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, सरकारी स्वामित्व वाली सेल (SAIL) और 25 अन्य कंपनियों को स्टील की कीमतें जानबूझकर बढ़ाने के आरोप में एंटीट्रस्ट कानून का उल्लंघन करते पाया है। इस मामले में अधिकारियों और कंपनियों पर भारी जुर्माना लगने का खतरा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 से 2023 तक 56 शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ जांच हुई, जिसमें जेएसडब्ल्यू के एमडी सज्जन जिंदल, टाटा स्टील के सीईओ टी.वी. नरेंद्रन और सेल के चार पूर्व अध्यक्ष शामिल हैं।
जांच की शुरुआत और विस्तार
सीसीआई की जांच की शुरुआत 2021 में हुई, जब बिल्डर्स के एक ग्रुप ने अदालत में आरोप लगाया कि 9 कंपनियां मिलकर स्टील की सप्लाई सीमित कर रही हैं और कीमतें बढ़ा रही हैं।
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2022 में जांच का दायरा बढ़ाकर 31 कंपनियों और दर्जनों अधिकारियों तक कर दिया गया।
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सीसीआई ने जांच के दौरान कंपनियों के व्हाट्सएप चैट और फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स की समीक्षा की।
भारी जुर्माने का खतरा
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड स्टील उत्पादक है।
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जेएसडब्ल्यू स्टील की मार्केट हिस्सेदारी: 17.5%
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टाटा स्टील: 13.3%
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SAIL: 10%
सीसीआई के नियमों के अनुसार, कंपनियों पर तीन गुना लाभ या टर्नओवर का 10% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। अधिकारियों पर भी व्यक्तिगत जुर्माना लग सकता है।
व्हाट्सएप चैट में मिले अहम सबूत
जांच में पाया गया कि स्टील निर्माता क्षेत्रीय उद्योग समूहों के बीच व्हाट्सएप पर संदेशों के माध्यम से कीमतों में हेरफेर और उत्पादन कटौती की योजनाएं बनाई जा रही थीं। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियों ने जानबूझकर बाज़ार को नियंत्रित किया और कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ाया। (Anti Trust India)
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कंपनियों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
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जेएसडब्ल्यू और सेल ने आरोपों से इनकार किया।
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टाटा स्टील और अधिकारियों ने रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया।
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सीसीआई का अंतिम आदेश जारी होने में कई महीने लग सकते हैं, जिसमें कंपनियों और अधिकारियों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का मौका मिलेगा।
स्टील इंडस्ट्री का अब तक का सबसे बड़ा विवाद
- विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला भारतीय स्टील इंडस्ट्री के सबसे बड़े एंटीट्रस्ट विवाद के रूप में दर्ज होगा।
- 2023 तक के आठ वित्तीय वर्षों के ऑडिट डेटा कंपनियों से मांगे गए हैं ताकि संभावित जुर्माने की गणना की जा सके।












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