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‘एक कहानी जो भाई ने सुनाई’ – Razneesh Ghai ने क्यों बनाई ‘120 बहादुर’?

‘एक कहानी जो भाई ने सुनाई’ – Razneesh Ghai ने क्यों बनाई ‘120 बहादुर’?

भाई की बताई कहानी से जन्मी एक दमदार वार फिल्म

120 Bahadur : फरहान अख्तर स्टारर वार फिल्म “120 बहादुर” को लेकर निर्देशक रज़नीश घई ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि इस फिल्म की नींव एक ऐसी कहानी पर टिकी है, जो उनके भाई ने कई साल पहले सुनाई थी — और जो बरसों तक उनके दिल-दिमाग में बस गई।

भाई की सुनाई कहानी जिसने बदल दी दिशा

10 साल पुरानी याद ने किया फिल्म बनाने को मजबूर

IFFI गोवा में बातचीत के दौरान रज़नीश घई ने कहा:

“मेरे भाई ने यह कहानी लगभग दस साल पहले सुनाई थी और यह कभी दिमाग से निकली ही नहीं। उसी की वजह से ‘120 बहादुर’ बनी।”

ये कहानी थी 1962 के रेज़ांग ला युद्ध की—जिसने उनके मन में गहरा असर छोड़ा। लगभग पाँच साल पहले उन्होंने इस फिल्म पर काम शुरू किया और 21 नवंबर को IFFI में इसका प्रीमियर हुआ।

अब नहीं बनाएंगे वॉर फिल्म—अगली फिल्म होगी अलग जॉनर में

Operation Sindoor पर फिल्म?—रज़नीश घई ने दिया जवाब

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी अगली फिल्म भी सैन्य अभियान पर आधारित होगी, विशेषकर ऑपरेशन सिंदूर पर, तो घई ने मुस्कुराते हुए कहा:

“नहीं, अभी नहीं… अगली बार शायद हॉरर फिल्म बनाऊँगा।”

‘120 बहादुर’ किस पर आधारित है?

1962 के भारत-चीन युद्ध की शौर्य गाथा

फिल्म 1962 के रेज़ांग ला के युद्ध पर आधारित है। कहानी दिखाती है:

  • कुमाऊँ रेजिमेंट की चार्ली कंपनी

  • चीन की सेना से ज़ीरो से नीचे तापमान में लड़ाई

  • 18,000 फीट की ऊँचाई पर जंग

  • मेजर शैतान सिंह का नेतृत्व

मेजर शैतान सिंह को उनकी वीरता के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। 120 सैनिकों में से केवल 6 ही जीवित लौट पाए थे।

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अहीर समुदाय की आपत्ति—फिल्म पर उठा विवाद

क्या अहीर सैनिकों को कम दिखाया गया? घई ने दिया साफ जवाब

फिल्म रिलीज़ से पहले विवाद तब शुरू हुआ जब अहीर समुदाय ने आरोप लगाया कि फिल्म में उनके सैनिकों की भूमिका को कम करके दिखाया गया है।

रज़नीश घई ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा:

“हमने अहीरों को पूरा श्रेय दिया है। मुझे नहीं समझ आता वे क्यों शिकायत कर रहे हैं।”

याचिका में यह भी कहा गया कि 120 में से 113 सैनिक अहीर समुदाय से थे, इसलिए फिल्म का नाम “120 वीर अहीर” रखा जाए या फिर फिल्म को काल्पनिक घोषित किया जाए।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका को निपटा दिया। फिल्म के अंत में सभी 120 सैनिकों के नाम दिखाए जाते हैं।

फरहान अख्तर बोले — इतिहास की भूली कहानियों को याद रखने की ज़रूरत

“कुछ कहानियाँ इतिहास में खो जाती हैं”—मेजर शैतान सिंह के किरदार पर प्रतिक्रिया

फरहान अख्तर ने कहा:

“हमारे इतिहास में ऐसी कई कहानियाँ हैं जो धीरे-धीरे यादों से मिट जाती हैं। फिल्मों के जरिए हम लोगों को इन बलिदानों की याद दिला सकते हैं।”

रज़नीश घई ने फरहान की तारीफ करते हुए उन्हें “वन मैन आर्मी” बताया और कहा कि शूटिंग के दौरान वे हमेशा मदद को तैयार रहते थे।

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