Education Loan News: देश में बढ़ती शिक्षा लागत के बावजूद Education Loan लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या लगातार घट रही है, जिसे लेकर संसद की Education, Women, Children, Youth and Sports Standing Committee ने गंभीर चिंता जताई है। दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लोन लेने वाले छात्रों की संख्या कम हो रही है, लेकिन कुल लोन राशि तेजी से बढ़ी है, जो सिस्टम में बड़ा गैप दिखाती है। कमेटी ने एजुकेशन लोन रीपेमेंट और एलिजिबिलिटी सिस्टम में बड़े बदलाव की सिफारिशें की हैं।
2014–2025 तक Education Loan का पूरा ट्रेंड – आंकड़े चौंकाने वाले
कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार:
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2014 में Active Education Loans: 23.36 लाख
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2025 में Active Loans घटकर: 20.63 लाख
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कुल लोन अमाउंट 2014: ₹52,327 करोड़
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कुल लोन अमाउंट 2025: ₹1,37,474 करोड़
इससे साफ है कि––
- कम स्टूडेंट लोन ले पा रहे हैं
- जो ले रहे हैं, उन्हें बहुत बड़ी राशि लेनी पड़ रही है
कमेटी की टॉप सिफारिशें: क्या बदल सकता है शिक्षा लोन सिस्टम?
1️⃣ इनकम-आश्रित (Income-Contingent) Repayment Model लागू हो
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EMI आपकी कमाई के प्रतिशत के आधार पर तय हो
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बेरोजगारी के दौरान राहत मिले
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बैंकों का NPA कम होगा
2️⃣ मोरेटोरियम पीरियड बढ़े – पढ़ाई + 2 साल तक EMI न हो
अभी EMI शुरू होती है: कोर्स खत्म होने के 1 साल बाद
सिफारिश: इसे बढ़ाकर 2 साल किया जाए
3️⃣ Credit Guarantee Fund की लिमिट 5 लाख → 20 लाख की जाए
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गरीब व सामान्य परिवारों के लिए लोन मिलना आसान होगा
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फीस बढ़ोतरी का दबाव कम होगा
4️⃣ सभी बैंकों में एक जैसी Loan Policy और Interest Rate हो
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स्टूडेंट्स को मनमानी ब्याज दर और अलग-अलग नियमों का सामना न करना पड़े
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पूरे देश में एक समान सिस्टम बने (Education Loan News)
5️⃣ गरीब परिवारों (BPL) को प्राथमिकता
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उच्च शिक्षा सबके लिए सुलभ बने
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बैंक इनकम क्राइटेरिया के नाम पर लोन न रोकें
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Loan Eligibility पर बड़ी सिफारिश: Income Criteria की जगह Ration Card हो आधार
कमेटी का कहना है––
- इनकम सर्टिफिकेट मनमाना है
- इसे वेरिफाई करना मुश्किल
- इसी वजह से लाखों छात्रों को लोन मिल ही नहीं पाता
इसलिए उन्होंने सुझाव दिया है कि:
- Eligibility का आधार “राशन कार्ड” होना चाहिए
- खासतौर पर गरीब और निम्न आय वाले परिवारों के लिए।
Education Loan पर कमेटी की रिपोर्ट का मतलब क्या है?
- छात्रों पर EMI का बोझ घटेगा
- लोन सिस्टम आसान और पारदर्शी होगा
- गरीब परिवारों को बेहतर अवसर मिलेंगे
- बेरोजगारी के दौरान लोन डिफॉल्ट और NPA घटेगा
- उच्च शिक्षा अधिक सुलभ हो सकेगी











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