Pak Economic Crisis: पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए IMF ने एक बार फिर करोड़ों डॉलर का कर्ज मंजूर कर दिया है। बढ़ती महंगाई, घटते विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ते कर्ज के बीच यह फंड पाकिस्तान के लिए राहत लेकर आया है। लेकिन इस मदद के बदले IMF ने सख्त शर्तें भी थमा दी हैं—जिनमें सरकारी कंपनियों का निजीकरण और टैक्स सुधार शामिल हैं।
IMF का बड़ा फैसला: पाकिस्तान को मिलेगा 1.2 अरब डॉलर
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान के लिए नई कर्ज समीक्षा को मंजूरी दे दी है। इसके तहत पाकिस्तान को करीब 1.2 अरब डॉलर की राशि रिलीज की जाएगी।
- विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में मदद
- महंगाई पर काबू पाने में राहत
- IMF कार्यक्रम फिलहाल ट्रैक पर
IMF बोर्ड की मंजूरी के बाद यह फंड कुछ दिनों में पाकिस्तान को जारी कर दिया जाएगा।
IMF की शर्तें: कर्ज के बदले कड़ा सबक
1️⃣ सरकारी कंपनियों का निजीकरण तेज करने का आदेश
IMF चाहता है कि पाकिस्तान बड़ी कंपनियों को निजी हाथों में सौंपे ताकि सरकार की कमाई बढ़ सके।
2️⃣ टैक्स कलेक्शन बढ़ाने का दबाव
कमजोर टैक्स वसूली से परेशान IMF ने पाकिस्तान को राजस्व बढ़ाने की कड़ी सलाह दी है।
3️⃣ घाटा कम करने पर जोर
आर्थिक सुधारों को और तेजी से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
4️⃣ निजी सेक्टर को बढ़ावा
IMF का कहना है कि निजी सेक्टर के बिना अर्थव्यवस्था को स्थिर नहीं किया जा सकता।
किस स्कीम के तहत कितना पैसा?
IMF बोर्ड ने पाकिस्तान को दो फैसिलिटी के तहत रकम जारी करने की मंजूरी दी:
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7 अरब डॉलर वाले EFF (Extended Fund Facility) से: 1 अरब डॉलर
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Resilience & Sustainability Facility से: 20 करोड़ डॉलर
अब तक पाकिस्तान को कुल 3.3 अरब डॉलर मिल चुके हैं। (Pak Economic Crisis)
कर्ज चुकाने को पाकिस्तान बेचेगा एयरपोर्ट!
IMF की शर्तों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान अब बड़ी-बड़ी सरकारी संपत्तियों को बेचने की तैयारी में है।
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PIA की बहुमत हिस्सेदारी बिक्री पर
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि:
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PIA का प्राइवेटाइजेशन 23 दिसंबर को होगा
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चार बड़े समूह इस बोली में शामिल होंगे
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इसमें फौजी फर्टिलाइजर, लकी सीमेंट, आरिफ हबीब ग्रुप और एयर ब्लू लिमिटेड शामिल हैं
यह पिछले 20 सालों में पाकिस्तान का सबसे बड़ा निजीकरण होगा।
IMF कार्यक्रम ने कैसे संभाली पाक अर्थव्यवस्था?
IMF के मुताबिक:
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महंगाई में थोड़ा सुधार
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विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि
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निवेशकों का भरोसा लौटा
पिछले साल पाकिस्तान भुगतान संकट से जूझ रहा था और महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। IMF प्रोग्राम ने हालात को कुछ हद तक स्थिर किया है। हालांकि कर्ज और निजीकरण का बोझ पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा रहा है।












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