Funeral Rituals: भारत में मृत्यु को जीवन का सबसे संवेदनशील और भावनात्मक चरण माना जाता है। इस समय परिवार और समाज द्वारा निभाई जाने वाली कई परंपराएं गहरे आध्यात्मिक अर्थ रखती हैं। ऐसी ही एक परंपरा है — अंतिम संस्कार के दौरान सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनना। लेकिन आखिर क्यों सफेद रंग को ही शोक का प्रतीक माना गया? आइए विस्तार से समझते हैं।
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
1. शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक
- हिंदू धर्म में सफेद रंग को शुद्धता, सत्य और सादगी का प्रतीक माना जाता है।
- मृत्यु के बाद आत्मा को पवित्र और मुक्त माना जाता है, और सफेद वस्त्र उनके लिए एक शांत व पवित्र वातावरण का संकेत देते हैं।
2. वैराग्य और त्याग
- सफेद रंग सांसारिक मोह-माया से दूर रहने और त्याग की भावना दर्शाता है।
- इस समय परिवार यह स्वीकार करता है कि जीवन अस्थायी है और भौतिक संसार से लगाव कम करना चाहिए।
3. शांति और संयम का संदेश
- सफेद रंग मन को शांत करने वाला माना जाता है।
- शोक के समय यह रंग परिवार को भावनात्मक रूप से स्थिर रखने में मदद करता है और वातावरण को गंभीर तथा संतुलित बनाता है।
4. नए सफर की ओर संकेत
- कुछ मान्यताओं के अनुसार, सफेद रंग नई शुरुआत का प्रतीक भी है।
- मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि एक नए जीवन-चक्र की शुरुआत माना जाता है। सफेद वस्त्र उसी नए सफर का प्रतीक हैं।
सांस्कृतिक और सामाजिक कारण
1. सबके लिए समान रंग – बिना भेदभाव
- सफेद एक तटस्थ रंग है। यह किसी भी तरह के सामाजिक, आर्थिक या धार्मिक भेदभाव को नहीं बढ़ाता।
- शोक के समय सभी लोग समान रूप से संवेदना व्यक्त करते हैं।
2. ध्यान आकर्षित करने से बचना
- चमकीले और गहरे रंग उत्सव, खुशी और आकर्षण से जुड़े होते हैं।
- अंतिम संस्कार की गंभीरता बनाए रखने के लिए सफेद जैसे सादे रंग पहने जाते हैं ताकि ध्यान मृतक के प्रति सम्मान पर रहे, न कि कपड़ों पर। (Funeral Rituals)
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अन्य संस्कृतियों में शोक के रंग
काले रंग का प्रचलन (पश्चिमी देश)
- जहां भारत में सफेद रंग शोक का प्रतीक है, वहीं पश्चिमी देशों में शोक के समय काले कपड़े पहनने की परंपरा है।
- काला रंग वहां दुःख, गंभीरता और मौन का संकेत देता है।
भारत में कुछ अपवाद
भारत के कुछ समुदायों या क्षेत्रों में शोक के दौरान अन्य रंगों का प्रयोग भी देखा जाता है, लेकिन सफेद वस्त्र पहनना सबसे व्यापक और प्रचलित परंपरा है।















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