Natural Farming Course: भारत में नेचुरल फार्मिंग अब सिर्फ खेती की प्रैक्टिस नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा का हिस्सा बनने जा रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) ने देशभर के एजुकेशन इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटीज को नेचुरल फार्मिंग में UG, PG और PhD कार्यक्रम शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
नेचुरल फार्मिंग को क्यों बनाया गया राष्ट्रीय महत्व का विषय?
ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने पत्र में लिखा:
- नेचुरल फार्मिंग सस्टेनेबल एग्रीकल्चर का भविष्य है
- यह इकोसिस्टम बैलेंस, किसान कल्याण, और एंवायरनमेंट मैनेजमेंट से जुड़ा है
- भारत की स्ट्रेटेजिक एग्रीकल्चर पॉलिसी में इसका महत्व लगातार बढ़ रहा है
इसलिए इसे शिक्षा प्रणाली में शामिल करना समय की जरूरत है।
Natural Farming में शुरू होगा BSc (Hons) Agriculture Program
ICAR ने पुष्टि की है कि:
- BSc ऑनर्स एग्रीकल्चर — नेचुरल फार्मिंग प्रोग्राम को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है
यह कोर्स NEP 2020 गाइडलाइंस के अनुसार विकसित किया गया है - इसे 6th Dean Committee की सिफारिशों के बाद क्लियर किया गया
- कुछ यूनिवर्सिटीज ने इसे 2023-24 से ही शुरू कर दिया है
- बाकी संस्थानों को इसे अगले अकादमिक सत्र से लागू करने के लिए कहा गया है
यह देश में पहली बार है जब नेचुरल फार्मिंग को रेगुलर अंडरग्रेजुएट कोर्स का हिस्सा बनाया जा रहा है। (Natural Farming Course)
PG और PhD क्यों ज़रूरी?
ICAR के DG के अनुसार:
- केमिकल-फ्री फूड सिस्टम की मांग तेजी से बढ़ रही
- मिट्टी की सेहत सुधारने पर राष्ट्रीय फोकस
- लो-एमिशन फार्मिंग की आवश्यकता पहले से ज्यादा
- मजबूत एग्रो-इकोसिस्टम के लिए एडवांस्ड शोध अनिवार्य
इसलिए सभी एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटीज को MSc और PhD इन नेचुरल फार्मिंग शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
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ICAR देगा पूरी मदद — Academic & Technical Support
ICAR ने वादा किया है:
- पोस्टग्रेजुएशन और PhD के लिए उत्तम करिकुलम बनाने में सहायता
- गाइडलाइन, सिलेबस, रिसोर्स मैटेरियल उपलब्ध कराएगा
- यूनिवर्सिटीज को शैक्षणिक और तकनीकी दोनों प्रकार का सहयोग मिलेगा
इस पहल का मकसद है—
- भविष्य के लिए नेचुरल फार्मिंग के विशेषज्ञ तैयार करना
- केमिकल-फ्री कृषि की ओर देश को आगे बढ़ाना














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