हर साल 14 नवंबर को भारत में बाल दिवस (Children’s Day) मनाया जाता है। यह दिन केवल उत्सव नहीं, बल्कि यह याद दिलाता है कि बच्चे ही देश का भविष्य हैं। उनके सपने, मासूमियत और मुस्कान भारत की असली ताकत हैं।
1️⃣ पंडित नेहरू और उनके बच्चों के प्रति प्रेम
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पंडित जवाहरलाल नेहरू को बच्चों से गहरा स्नेह था।
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उनका मानना था कि बच्चे ही वह मिट्टी हैं जिससे भविष्य की इमारत बनती है।
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बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र सोच और सपने देखने की आज़ादी मिलनी चाहिए।
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इस कारण उन्हें प्यार से ‘चाचा नेहरू’ कहा जाता है।
2️⃣ बाल दिवस क्यों मनाया जाता है?
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बाल दिवस मनाने की मुख्य वजह है नेहरू जी की जयंती (14 नवंबर)।
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बच्चों के प्रति उनके स्नेह और विश्वास के कारण, यह दिन भारत के बच्चों के नाम समर्पित है।
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यह दिन हमें याद दिलाता है कि बच्चों को सुरक्षा, स्नेह और समान अवसर मिलना चाहिए।
3️⃣ बाल दिवस की शुरुआत और इतिहास
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भारत में बाल दिवस की शुरुआत 1956 में 20 नवंबर को हुई, जब इसे संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा यूनिवर्सल चिल्ड्रन्स डे घोषित किया गया।
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पंडित नेहरू के निधन (27 मई 1964) के बाद, उनकी जयंती 14 नवंबर को राष्ट्रीय बाल दिवस घोषित किया गया।
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तब से यह दिन हर साल बच्चों के नाम मनाया जाता है।
4️⃣ बाल दिवस का उद्देश्य
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बच्चों के अधिकार और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
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बाल श्रम, बाल अपराध और भेदभाव के खिलाफ समाज में आवाज उठाना।
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बच्चों को स्नेह, प्यार और समान अवसर देना और उनकी प्रतिभा निखारने के लिए प्रेरित करना।
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यह दिन हमें यह सिखाता है कि बच्चों की हंसी और उनका खेलना-कूदना ही राष्ट्र की प्रगति का आधार है।
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5️⃣ बाल दिवस कैसे मनाया जाता है?
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देशभर के स्कूल, कॉलेज और संस्थानों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिताएं, ड्रॉइंग और निबंध लेखन आयोजित किए जाते हैं।
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कई जगह माता-पिता और शिक्षक बच्चों को तोहफे और मिठाई देते हैं।
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मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के अधिकार और शिक्षा के संदेश साझा किए जाते हैं।














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