Harish Rana Case: हाल ही में Supreme Court of India ने लंबे समय से अचेत अवस्था में पड़े हरीश राणा को इच्छामृत्यु (Euthanasia) की अनुमति दे दी। बताया जा रहा है कि वह करीब 13 साल से कोमा की स्थिति में थे और डॉक्टरों के मुताबिक उनके ठीक होने की संभावना बेहद कम थी। इस मामले के सामने आने के बाद एक अहम सवाल उठने लगा है—अगर कोई व्यक्ति कोमा में है तो कोर्ट की अनुमति क्यों जरूरी होती है, जबकि ब्रेन डेथ में इसकी जरूरत नहीं पड़ती? इसका जवाब समझने के लिए कोमा और ब्रेन डेथ के बीच का फर्क जानना जरूरी है।
कोमा क्या होता है?
कोमा एक गंभीर मेडिकल स्थिति है, जिसमें व्यक्ति गहरी बेहोशी में चला जाता है।
इस स्थिति में मरीज:
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आंखें नहीं खोल पाता
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बोल या प्रतिक्रिया नहीं दे पाता
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शरीर की सामान्य गतिविधियां नहीं होतीं
हालांकि, कोमा में दिमाग पूरी तरह बंद नहीं होता। मरीज की सांस और दिल की धड़कन चलती रहती है। कई मामलों में व्यक्ति कुछ दिनों, हफ्तों या महीनों बाद होश में भी आ सकता है। लेकिन कुछ मरीज लंबे समय तक कोमा में रह सकते हैं।
ब्रेन डेथ क्या होती है?
ब्रेन डेथ वह स्थिति है, जब दिमाग पूरी तरह काम करना बंद कर देता है।
इस स्थिति में:
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ब्रेन के सभी फंक्शन खत्म हो जाते हैं
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व्यक्ति खुद से सांस नहीं ले पाता
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शरीर की कोई प्रतिक्रिया नहीं होती
मेडिकल साइंस में ब्रेन डेथ को कानूनी रूप से मृत्यु माना जाता है। डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम जांच के बाद किसी व्यक्ति को ब्रेन डेड घोषित करती है। (Harish Rana Case)
कोमा और ब्रेन डेथ में मुख्य अंतर
| बिंदु | कोमा | ब्रेन डेथ |
|---|---|---|
| दिमाग की स्थिति | कुछ हिस्सा काम करता है | दिमाग पूरी तरह बंद |
| सांस और दिल की धड़कन | सामान्य रूप से चलती रहती है | मशीन के सहारे चल सकती है |
| ठीक होने की संभावना | कुछ मामलों में संभव | बिल्कुल नहीं |
| कानूनी स्थिति | जीवित माना जाता है | कानूनी रूप से मृत |
डॉक्टर कैसे तय करते हैं मरीज कोमा में है या ब्रेन डेड?
- डॉक्टर कई न्यूरोलॉजिकल टेस्ट और मेडिकल जांच करते हैं, जिससे पता चलता है कि मरीज की ब्रेन एक्टिविटी कितनी है।
- इन जांचों के आधार पर मेडिकल बोर्ड तय करता है कि मरीज कोमा में है या ब्रेन डेथ की स्थिति में।
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कोमा में कोर्ट की अनुमति क्यों जरूरी होती है?
- कोमा में मरीज के ठीक होने की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं होती, इसलिए उसे कानूनी रूप से मृत नहीं माना जाता।
- ऐसे में अगर लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की बात आती है तो यह एक बेहद संवेदनशील निर्णय होता है।
इसी वजह से:
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डॉक्टर अकेले फैसला नहीं ले सकते
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परिवार भी सीधे निर्णय नहीं ले सकता
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इसके लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी होती है
आमतौर पर कोर्ट मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट, मरीज की स्थिति और रिकवरी की संभावना को देखकर फैसला सुनाता है। (Harish Rana Case)
ब्रेन डेथ में अलग प्रक्रिया क्यों होती है?
ब्रेन डेथ घोषित होने के बाद व्यक्ति को कानूनी रूप से मृत माना जाता है।
इस स्थिति में:
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लाइफ सपोर्ट हटाया जा सकता है
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परिवार की अनुमति से अंगदान (Organ Donation) भी किया जा सकता है
यही कारण है कि ब्रेन डेथ और कोमा से जुड़े कानूनी फैसले अलग-अलग होते हैं।















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