No Flying Zone: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अब तक 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। इसी बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हमले के संकेत मिलने के बाद ईरान ने बड़ा कदम उठाते हुए अपने एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। गुरुवार को ईरान ने करीब 5 घंटे के लिए ‘No Flying Zone’ घोषित किया, जिसका असर न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया की एविएशन व्यवस्था पर पड़ा।
क्या है No Flying Zone?
No Flying Zone का मतलब होता है ऐसा हवाई क्षेत्र, जहां किसी भी प्रकार की उड़ान (कॉमर्शियल या मिलिट्री) की इजाजत नहीं होती।
आसान उदाहरण से समझें
जैसे भारत में:
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राष्ट्रपति भवन
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संसद भवन
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लाल किला
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ताजमहल
इनके ऊपर से किसी विमान को उड़ने की अनुमति नहीं होती। यही नियम बड़े स्तर पर पूरे देश या एयरस्पेस पर लागू किया जाए, तो उसे No Flying Zone कहा जाता है।
जंग या तनाव के समय No Flying Zone का मतलब
जब किसी देश पर युद्ध का खतरा होता है:
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वह अपने पूरे एयरस्पेस को No Flying Zone घोषित कर सकता है
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उस क्षेत्र पर पूरी तरह वायुसेना का नियंत्रण हो जाता है
अगर कोई विदेशी विमान बिना अनुमति उस एयरस्पेस में घुसता है, तो:
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पहले चेतावनी दी जाती है
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फिर एस्कॉर्ट कर लैंड कराया जा सकता है
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आदेश न मानने पर विमान को मार गिराने तक का अधिकार होता है
NOTAM क्या होता है और क्यों जरूरी है?
NOTAM (Notice to Airmen) एक आधिकारिक सूचना होती है, जिसे किसी देश की एविएशन अथॉरिटी जारी करती है।
इसमें जानकारी दी जाती है:
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एयरस्पेस बंद या सीमित होने की
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सैन्य गतिविधियों की
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संभावित खतरे
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रनवे बंद होने
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मौसम या तकनीकी दिक्कतों की
फ्लाइट प्लान करने से पहले पायलट के लिए NOTAM देखना अनिवार्य होता है। अगर कोई विमान NOTAM को नजरअंदाज करता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
ईरान का एयरस्पेस इतना अहम क्यों है?
ईरान का एयरस्पेस दुनिया के सबसे व्यस्त East–West एयर रूट पर स्थित है।
इसका महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि:
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यह यूरोप और एशिया को जोड़ता है
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भारत, चीन, जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया जाने वाली ज्यादातर यूरोपीय फ्लाइट्स यहीं से गुजरती हैं
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यह सबसे छोटा और किफायती हवाई रास्ता है
इस रूट से:
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समय की बचत होती है
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ईंधन खर्च कम होता है
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टिकट सस्ती रहती है (No Flying Zone)
ईरान का एयरस्पेस बंद होने पर क्या होता है?
अगर एयरलाइंस ईरान के एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं करतीं, तो उन्हें:
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उत्तर में कैस्पियन सागर के ऊपर से
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या दक्षिण में सऊदी अरब और मिस्र के रास्ते
लंबा चक्कर लगाना पड़ता है।
इसका असर:
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उड़ान समय कई घंटे बढ़ जाता है
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ईंधन खर्च बढ़ता है
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टिकट महंगी होती है
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फ्लाइट रद्द या रीरूट करनी पड़ती है
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इंडिगो की फ्लाइट और अचानक बंद हुआ आसमान
No Flying Zone की घोषणा से ठीक पहले:
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इंडिगो की फ्लाइट 6E1808
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जॉर्जिया से भारत आ रही थी
फ्लाइट ट्रैकिंग साइट के मुताबिक:
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यह फ्लाइट रात करीब 2:35 बजे ईरान के ऊपर से गुजरी
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इसके कुछ ही देर बाद ईरान ने एयरस्पेस बंद कर दिया
फ्लाइट सुरक्षित दिल्ली पहुंच गई, लेकिन इसके बाद कोई कॉमर्शियल विमान उस रूट से नहीं जा सका।
2020 की वो बड़ी गलती, जिसने दुनिया को चौंका दिया
ईरान का एयरस्पेस जितना अहम है, उतना ही संवेदनशील भी।
8 जनवरी 2020 की घटना:
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यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस की फ्लाइट PS752
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तेहरान से उड़ान भरने के कुछ मिनट बाद
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ईरानी एयर डिफेंस ने गलती से मिसाइल से मार गिराया
इस हादसे में:
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176 यात्रियों और क्रू की मौत हो गई
उस समय अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर था और विमान को गलती से दुश्मन लक्ष्य समझ लिया गया।
फिलहाल ईरान का एयरस्पेस स्टेटस क्या है?
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ईरान ने 5 घंटे बाद एयरस्पेस दोबारा खोल दिया
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लेकिन हालात अब भी संवेदनशील हैं
असर:
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दुबई, तुर्किश, इंडिगो, एयर इंडिया जैसी कई फ्लाइट्स
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या तो कैंसिल
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या रीरूट की जा रही हैं
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जर्मनी ने अपनी एयरलाइंस को ईरान के एयरस्पेस से बचने की सलाह दी है














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