Gand Mool Nakshatra: बच्चे के जन्म के समय ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति को लेकर भारतीय ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व दिया गया है। जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति के आधार पर कुंडली बनाई जाती है, जिससे व्यक्ति के स्वभाव, भविष्य, स्वास्थ्य और जीवन में आने वाली चुनौतियों का आकलन किया जाता है। ज्योतिष में जहां कई नक्षत्र अत्यंत शुभ माने जाते हैं, वहीं कुछ नक्षत्र ऐसे भी बताए गए हैं जिन्हें जन्म के लिए अशुभ माना जाता है। इन्हीं में से एक है गंडमूल नक्षत्र, जिसे लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं।
क्या होता है गंडमूल नक्षत्र?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब जन्म के समय चंद्रमा निम्नलिखित नक्षत्रों में स्थित होता है, तो गंडमूल नक्षत्र दोष बनता है—
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अश्विनी नक्षत्र (केतु)
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अश्लेषा नक्षत्र (बुध)
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मघा नक्षत्र (केतु)
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मूल नक्षत्र (केतु)
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ज्येष्ठा नक्षत्र (बुध)
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रेवती नक्षत्र (बुध)
इन नक्षत्रों में जन्म लेने वाले जातकों को जीवन में संघर्ष, मानसिक तनाव और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसी धार्मिक मान्यता है।
क्यों माना जाता है परिवार के लिए कष्टदायक?
ज्योतिषविदों का मानना है कि गंडमूल नक्षत्र में जन्मे बच्चे को
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जीवन में अधिक उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं
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परिवार पर मानसिक, आर्थिक या स्वास्थ्य से जुड़ा दबाव आ सकता है
कहा जाता है कि ऐसे बच्चे “सोने के पैरों से जन्म लेते हैं”, यानी भविष्य में उन्नति करते हैं, लेकिन शुरुआती समय परिवार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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गंडमूल दोष शांति पूजा क्यों जरूरी मानी जाती है?
मान्यताओं के अनुसार, गंडमूल नक्षत्र में जन्मे बच्चों के जीवन में शांति और बाधा निवारण के लिए गंडमूल शांति पूजा कराई जाती है।
पूजा से जुड़ी प्रमुख परंपराएं:
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जन्म के 27वें दिन गंडमूल शांति पूजन
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27 दिनों तक रोज बच्चे के सिरहाने 27 मूली के पत्ते रखना
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27वें दिन पत्तों को बहते जल में प्रवाहित करना
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पिता द्वारा 27 दिनों तक बच्चे का मुख न देखना
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पूजा के बाद ब्राह्मण भोज और दान
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माता-पिता द्वारा 108 बार महामृत्युंजय मंत्र जाप (Gand Mool Nakshatra)
क्या बाद में भी कराई जा सकती है पूजा?
शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि यदि किसी कारणवश जन्म के समय पूजा न हो पाए, तो
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इसे बाद की किसी भी उम्र में कराया जा सकता है
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पूजा घर या मंदिर, दोनों स्थानों पर संभव है
मान्यता है कि इस पूजा से नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और जीवन में संतुलन आता है।
जरूरी सलाह
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। आधुनिक विज्ञान इनकी पुष्टि नहीं करता। किसी भी चिंता या डर की स्थिति में विशेषज्ञ सलाह और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।















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