Turkman Gate History: दिल्ली का ऐतिहासिक तुर्कमान गेट एक बार फिर सुर्खियों में है। तुर्कमान गेट के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने के दौरान हिंसा, पत्थरबाजी और गिरफ्तारी की घटनाओं ने पूरे इलाके को चर्चा का केंद्र बना दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि आखिर तुर्कमान गेट का इतिहास क्या है और इसके नाम के पीछे कौन थे शाह तुर्कमान?
कौन थे हजरत शाह तुर्कमान बयाबानी?
- हजरत शाह तुर्कमान बयाबानी एक प्रसिद्ध सूफी संत थे। उनका पूरा नाम शाह तुर्कमान बयाबानी था।
- इतिहासकारों के अनुसार वे दिल्ली में बसने वाले शुरुआती इस्लामी सूफी संतों में शामिल थे।
- जब शाह तुर्कमान इस क्षेत्र में आए, तब यहां न तो कोई बस्ती थी और न ही आबादी—चारों ओर जंगल और पहाड़ियां थीं।
- इसी कारण उन्हें ‘बयाबानी’, यानी जंगल में रहने वाला कहा गया।
- जिस स्थान पर उन्होंने निवास किया, वहीं बाद में उनकी मजार बनाई गई।
तुर्कमान गेट के पास मौजूद शाह तुर्कमान की दरगाह
- इतिहास के दस्तावेज बताते हैं कि वर्ष 1250 ईस्वी के आसपास भी हजरत शाह तुर्कमान की कब्र मौजूद थी।
- आज उनकी दरगाह चांदनी चौक क्षेत्र में तुर्कमान गेट के पास स्थित है।
- समय के साथ इस मकबरे का स्वरूप बदला और अब यह कांच से बनी एक आधुनिक संरचना में तब्दील हो चुका है।
- जहां हर साल उनकी बरसी पर मेला लगता है और हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
तुर्कमान गेट का निर्माण किस मुगल शासक ने कराया?
साल 1638 में मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित कर शाहजहानाबाद बसाया। इसी दौरान लाल किला, जामा मस्जिद और चांदनी चौक जैसे ऐतिहासिक निर्माण हुए।
शहर की सुरक्षा के लिए शाहजहां ने 14 भव्य दरवाजे बनवाए, जिनमें-
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लाहौरी गेट
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अजमेरी गेट
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दिल्ली गेट
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मोरी गेट
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तुर्कमान गेट
शामिल थे। चूंकि यह द्वार शाह तुर्कमान की मजार के पास स्थित था, इसलिए इसका नाम तुर्कमान गेट रखा गया।
अतिक्रमण विवाद: क्यों भड़की हिंसा?
हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर तुर्कमान गेट के पास अवैध कब्जे हटाने के लिए प्रशासन पहुंचा। इस दौरान करीब 150–200 लोगों ने पुलिस और नगर निगम कर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत केस दर्ज कर 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक करीब 36 हजार वर्ग फुट जमीन से अतिक्रमण हटाया गया, जिसमें डायग्नोस्टिक सेंटर, बैंक्वेट हॉल और अवैध दीवारें शामिल थीं। (Turkman Gate History)
1976 में भी चला था बुलडोजर
तुर्कमान गेट अतिक्रमण का यह पहला मामला नहीं है। 1976 में आपातकाल के दौरान संजय गांधी के निर्देश पर यहां बड़े पैमाने पर झुग्गियां हटाई गई थीं। उस वक्त उद्देश्य था कि जामा मस्जिद से तुर्कमान गेट साफ दिखाई दे। इस अभियान में भारी विरोध हुआ और कई परिवारों को मंगोलपुरी व त्रिलोकपुरी में बसाया गया था।
इतिहास और वर्तमान का संगम
आज तुर्कमान गेट सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि शहर नियोजन, अतिक्रमण और कानून व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। इतिहास गवाह है कि यह इलाका पहले भी बदलाव के दौर से गुजर चुका है और एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में है।















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