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Ramayan Katha: क्या भगवान श्रीराम की कोई बहन भी थी? जानिए वह रहस्य जो बहुत कम लोग जानते हैं…

Ramayan Katha: क्या भगवान श्रीराम की कोई बहन भी थी? जानिए वह रहस्य जो बहुत कम लोग जानते हैं...

Ramayan Katha: त्रेतायुग में धर्म की स्थापना के लिए श्रीहरि विष्णु ने भगवान राम के रूप में अवतार लिया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन आदर्श, त्याग और कर्तव्य का प्रतीक माना जाता है। रामायण और रामचरितमानस जैसे ग्रंथों में उनके जीवन की हर महत्वपूर्ण घटना का वर्णन मिलता है। आम तौर पर लोग जानते हैं कि भगवान राम के तीन भाई थे—लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न। लेकिन बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि भगवान राम की एक बहन भी थीं, जिनका नाम शांता था।

कौन थीं शांता? भगवान राम की बड़ी बहन

  • शांता भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न से बड़ी बहन थीं।
  • हालांकि रामायण में उनका उल्लेख बहुत सीमित रूप में मिलता है
  • लेकिन धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में उनकी कथा का वर्णन किया गया है।

राजा दशरथ और माता कौशल्या की पुत्री थीं शांता

शांता का जन्म अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के घर हुआ था। माता कौशल्या की बड़ी बहन वर्षिणी थीं, जिनका विवाह अंग देश के राजा रोमपद से हुआ था। वर्षिणी की कोई संतान नहीं थी। एक बार वर्षिणी और राजा रोमपद अयोध्या आए और मजाक-मजाक में शांता को गोद लेने की इच्छा प्रकट की। राजा दशरथ ने इसे वचन मान लिया और शांता को अंग देश भेज दिया।

अंग देश की राजकुमारी बनीं शांता

  • गोद लिए जाने के बाद शांता अंग देश की राजकुमारी बन गईं।
  • इधर शांता के अयोध्या जाने के बाद राजा दशरथ निःसंतान हो गए।
  • उन्हें अपने वंश को आगे बढ़ाने की चिंता सताने लगी।

इसी कारण उन्होंने ऋषि श्रृंगी (श्रृंग ऋषि) को बुलाकर पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया। (Ramayan Katha)

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ऋषि श्रृंगी और शांता का विवाह

  • पुत्रकामेष्टि यज्ञ के फलस्वरूप भगवान राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ।
  • आगे चलकर राजकुमारी शांता का विवाह ऋषि श्रृंगी से हुआ, जो उसी यज्ञ को संपन्न कराने वाले महान ऋषि थे।

जब शांता ने दशरथ को बताई अपनी पहचान

  • कहा जाता है कि जब ऋषि श्रृंगी अपनी पत्नी शांता के साथ अयोध्या आए, तो शांता ने राजा दशरथ के चरण स्पर्श किए और अपनी पहचान प्रकट की।
  • तब राजा दशरथ को ज्ञात हुआ कि अंग देश की रानी शांता उनकी अपनी पुत्री हैं, जिन्हें उन्होंने वर्षों पहले गोद दे दिया था।

क्यों रामायण में शांता का उल्लेख कम है?

  • शांता का जीवन अधिकतर अयोध्या से बाहर बीता, इसलिए रामायण के मुख्य कथानक में उनका उल्लेख सीमित है।
  • लेकिन धार्मिक दृष्टि से उनका महत्व अत्यंत बड़ा है, क्योंकि भगवान राम के जन्म का कारण बने यज्ञ में उनका अप्रत्यक्ष योगदान था

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