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Kodungallur Bhagavathi Temple: केरल का रहस्यमयी मंदिर, जहां कभी होती थी पशु बलि, अब कुरुम्बा भगवती को चढ़ती है विशेष भेंट…

Kodungallur Bhagavathi Temple: केरल का रहस्यमयी मंदिर, जहां कभी होती थी पशु बलि, अब कुरुम्बा भगवती को चढ़ती है विशेष भेंट...

Kodungallur Bhagavathi Temple: दक्षिण भारत के प्राचीन और रहस्यमयी मंदिरों में कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ केरल के त्रिशूर जिले में स्थित है। मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं, देवी के उग्र स्वरूप और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

कुरुम्बा भगवती का उग्र रूप

इस मंदिर को श्री कुरुम्बा भगवती मंदिर भी कहा जाता है। भक्त देवी को कोडुंगल्लूर अम्मा के नाम से पुकारते हैं।
मान्यता है कि यहां विराजमान देवी मां काली का उग्र स्वरूप हैं, जिन्हें आठ भुजाओं वाली शक्तिशाली देवी के रूप में पूजा जाता है। देवी के हाथ में राक्षस का गदा होना उनकी रक्षक और संहारक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
मंदिर की ऊंचाई लगभग 32.53 मीटर (107 फीट) है।

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

  • कोडुंगल्लूर शहर कभी चेरा साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था

  • मान्यता है कि पहले यहां भगवान शिव की पूजा होती थी

  • बाद में परशुराम ने मंदिर के समीप मां काली की प्रतिमा स्थापित की

  • मंदिर परिसर में मौजूद पांच श्री चक्र, आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित माने जाते हैं, जिन्हें देवी शक्ति का प्रतीक कहा जाता है

केवल पुजारी चढ़ाते हैं फूल

  • इस मंदिर की एक खास परंपरा है कि
  • देवी को फूल केवल पुजारी ही अर्पित कर सकते हैं
  • आम श्रद्धालुओं को यह अधिकार नहीं दिया गया है।
  • मंदिर में रोजाना दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे तक पूजा-अर्चना होती है।

जहां कभी होती थी पक्षियों और बकरियों की बलि

कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर अपनी बलि प्रथा के लिए भी जाना जाता था। पहले यहां:

  • पक्षियों

  • बकरियों

की बलि दी जाती थी। लेकिन केरल सरकार के आदेश के बाद मंदिर में पशु बलि पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। अब देवी को लाल धोती अर्पित की जाती है, जिसे बलि का प्रतीकात्मक रूप माना जाता है। (Kodungallur Bhagavathi Temple)

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भरणी उत्सव: मंदिर का प्रमुख पर्व

इस मंदिर में हर साल भरणी उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

  • यह उत्सव मार्च–अप्रैल के बीच होता है

  • इसे केरल के प्रमुख धार्मिक त्योहारों में गिना जाता है

उत्सव की शुरुआत कोझिकलकु मूडल नामक अनुष्ठान से होती है, जिसे परंपरागत रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

मंदिर कैसे पहुंचें?

  • नेदुम्बस्सेरी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा – लगभग 21 किमी

  • इरिंजलकुडा रेलवे स्टेशन – नजदीकी स्टेशन

  • कोडुंगल्लूर बस स्टैंड – सुगम सड़क संपर्क

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